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Shayari Ayodhya - Author on ShareChat
Shayari Ayodhya
1K views • 19 days ago
#shayrana ishq
"प्रेम के बिना कोई नहीं मरता, लोग वैसे ही सुबह उठते हैं , काम पर जाते हैं , हँसते भी हैं कभी-कभी। मरता है तो बस भीतर का वह कोमल हिस्सा , जो किसी के होने से दुनिया को सुंदर मान बैठा था।" "प्रेम के बिना कोई नहीं मरता, लोग वैसे ही सुबह उठते हैं , काम पर जाते हैं , हँसते भी हैं कभी-कभी। मरता है तो बस भीतर का वह कोमल हिस्सा , जो किसी के होने से दुनिया को सुंदर मान बैठा था।"
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  • Shayari Ayodhya - Author on ShareChat
    Shayari Ayodhya
    #shayrana ishq
    66 एक बा२ज़ॉं पण्या महसूस कश देॅ 99 फिर वो लाख अच्छी बातें कर ले मुझे पराया ही लगता है ! 66 एक बा२ज़ॉं पण्या महसूस कश देॅ 99 फिर वो लाख अच्छी बातें कर ले मुझे पराया ही लगता है !
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  • Shayari Ayodhya - Author on ShareChat
    Shayari Ayodhya
    #shayrana ishq
    "٤آ, मैं यह सत्य स्वीकार चुका हूँ कि तुम कभी लौटकर नहीं आओगे। फिर भी न जाने क्यों हर रोज़ जा रहा हूँ मैं.. ক্রিয असंभव से प्रयास क्यों उस "द्वार" को अब तक बंद नहीं कर पाया, जहॉ हर शाम " अंतहीन प्रतीक्षा" Rி मेरे दिन के अंतिम प्रकाश तक को अपने साथ ले जाती है, और मेरे हिस्से केवल मौन की एक " अनंत रात" छोड़ जाती है"। "٤آ, मैं यह सत्य स्वीकार चुका हूँ कि तुम कभी लौटकर नहीं आओगे। फिर भी न जाने क्यों हर रोज़ जा रहा हूँ मैं.. ক্রিয असंभव से प्रयास क्यों उस "द्वार" को अब तक बंद नहीं कर पाया, जहॉ हर शाम " अंतहीन प्रतीक्षा" Rி मेरे दिन के अंतिम प्रकाश तक को अपने साथ ले जाती है, और मेरे हिस्से केवल मौन की एक " अनंत रात" छोड़ जाती है"।
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  • Shayari Ayodhya - Author on ShareChat
    Shayari Ayodhya
    #shayrana ishq
    अगर दिन लिखूँगा, निकल जाओगी लिखूँगा, ढल जाओगी I सुकून लिखूँगा, मुकर जाओगी लिखूँगा, মীমম बदल जाओगी हवा लिखूँगा, उड़ जाओगी पहाड़ लिखूँगा, टूट जाओगी पेड़ लिखूँगा, गिर जाओगी ٨٠٨ बदल जाओगी रंग नदी लिखूँगा, बह जाओगी लिखूँगा, पराई हो जाओगी अपना चलो साँस लिखता हूँ, जब जाओगी हमें संग ले जाओगी. @AKS_E_FAQEER अगर दिन लिखूँगा, निकल जाओगी लिखूँगा, ढल जाओगी I सुकून लिखूँगा, मुकर जाओगी लिखूँगा, মীমম बदल जाओगी हवा लिखूँगा, उड़ जाओगी पहाड़ लिखूँगा, टूट जाओगी पेड़ लिखूँगा, गिर जाओगी ٨٠٨ बदल जाओगी रंग नदी लिखूँगा, बह जाओगी लिखूँगा, पराई हो जाओगी अपना चलो साँस लिखता हूँ, जब जाओगी हमें संग ले जाओगी. @AKS_E_FAQEER
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  • Shayari Ayodhya - Author on ShareChat
    Shayari Ayodhya
    #shayrana ishq
    @AJAYQTS सारा खेल तो निगाहों का है सनम, झुकाई नहीं हमने हटाई नहीं ` तुमने ' @AJAYQTS सारा खेल तो निगाहों का है सनम, झुकाई नहीं हमने हटाई नहीं ` तुमने '
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  • Shayari Ayodhya - Author on ShareChat
    Shayari Ayodhya
    #shayrana ishq
    प्रेम में पुरुष अधिक कष्ट देने वाली स्त्री का त्याग करता 8 जबकि स्त्री अधिक प्रेम देने वाले पुरुष का त्याग कर देती है..!! प्रेम में पुरुष अधिक कष्ट देने वाली स्त्री का त्याग करता 8 जबकि स्त्री अधिक प्रेम देने वाले पुरुष का त्याग कर देती है..!!
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  • Shayari Ayodhya - Author on ShareChat
    Shayari Ayodhya
    #shayrana ishq
    घर में रखी इत्र की शीशियां ख़फ़ा हैं 35, मुलाकात के बाद मैंने उन्हें छुआ ही नहीं! तुम्हारे घर में रखी इत्र की शीशियां ख़फ़ा हैं 35, मुलाकात के बाद मैंने उन्हें छुआ ही नहीं! तुम्हारे
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  • Shayari Ayodhya - Author on ShareChat
    Shayari Ayodhya
    #shayrana ishq
    ताउम्र मलाल रहेगा कि हमसफर न बन सके , सुकून है कि जिंदगी के सफर में हम मिले तो थे..!! मगरएक ताउम्र मलाल रहेगा कि हमसफर न बन सके , सुकून है कि जिंदगी के सफर में हम मिले तो थे..!! मगरएक
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  • Shayari Ayodhya - Author on ShareChat
    Shayari Ayodhya
    #shayrana ishq
    अलविदा कहने के बाद भी यदि दिल उसके लौटने की प्रतीक्षा में है.. तो वहाँ 'प्रेम' है ! @गुलज़ारshayari Follow for more अलविदा कहने के बाद भी यदि दिल उसके लौटने की प्रतीक्षा में है.. तो वहाँ 'प्रेम' है ! @गुलज़ारshayari Follow for more
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  • Shayari Ayodhya - Author on ShareChat
    Shayari Ayodhya
    #shayrana ishq
    तुम चलो कुछ दूर साथ मेरे, इस पूरी दुनिया के सामने न दोस्त, न हमसफर न प्रेमी बनकर, पर चलने से पहले एक बार खुद से पूछ लेना ज़रूर क्या चल सकोगे..? तुम कुछ दूर मेरे कुछ नहीं बनकर, क्योंकि आसां है इस भागती दुनियां में . दोस्त, हमसफर या प्रेमी बन जाना . पर बहुत मुश्किल है किसी के साथ चलना बिना उसका कुछ भी बने बन सको तो मेरी रूह मेरे अल्फ़ाज़ बन जाना मेरी शायरी, मेरी ग़ज़ल में सिर्फः तुम ही तुम नज़र आना. "her unsaid" तुम चलो कुछ दूर साथ मेरे, इस पूरी दुनिया के सामने न दोस्त, न हमसफर न प्रेमी बनकर, पर चलने से पहले एक बार खुद से पूछ लेना ज़रूर क्या चल सकोगे..? तुम कुछ दूर मेरे कुछ नहीं बनकर, क्योंकि आसां है इस भागती दुनियां में . दोस्त, हमसफर या प्रेमी बन जाना . पर बहुत मुश्किल है किसी के साथ चलना बिना उसका कुछ भी बने बन सको तो मेरी रूह मेरे अल्फ़ाज़ बन जाना मेरी शायरी, मेरी ग़ज़ल में सिर्फः तुम ही तुम नज़र आना. "her unsaid"
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