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#हर लेती हैं बेटियाँ,
हर लेती हैं बेटियाँ, - सहती रहती रातनदिन, तरहन्तरह के तीर हर लेती हैं बेटियाँ , घर॰आँगन की पीर | सौदागर इस देश के, रहते मद में चूर : : सिंदूर | बिटिया को महँगा लगे , माथे का नहीं दुपट्टे की तरफ़, उठे किसी के हाथ बहना घर से जो चले , भैया चलता साथ | रूपनरंग नूर माँग भरी ना अब तलक, गया  उनकी माँगों ने किये, सपने चकनाचूर ख़ून पसीना जोड़कर, लो दहेज के साथ बिटिया के करने चला, दुखिया पीले हाथ आँगन की तुलसी जली, धूप पड़ी यों तेज़ নিনা ক্টত| इक तुलसी ससुराल में, झुसली बाबुल की छत ले गया, आख़िर कन्यादान बेटी के घर के लिए, अंजुम बिका मकान तेरे पाँवों से जगें , घर आँगन के भाग जा बेटी परदेस जा, जुग-जुग जिये सुहाग घर आँगन में हर तरफ़, एक मधुर गुंजार सहती रहती रातनदिन, तरहन्तरह के तीर हर लेती हैं बेटियाँ , घर॰आँगन की पीर | सौदागर इस देश के, रहते मद में चूर : : सिंदूर | बिटिया को महँगा लगे , माथे का नहीं दुपट्टे की तरफ़, उठे किसी के हाथ बहना घर से जो चले , भैया चलता साथ | रूपनरंग नूर माँग भरी ना अब तलक, गया  उनकी माँगों ने किये, सपने चकनाचूर ख़ून पसीना जोड़कर, लो दहेज के साथ बिटिया के करने चला, दुखिया पीले हाथ आँगन की तुलसी जली, धूप पड़ी यों तेज़ নিনা ক্টত| इक तुलसी ससुराल में, झुसली बाबुल की छत ले गया, आख़िर कन्यादान बेटी के घर के लिए, अंजुम बिका मकान तेरे पाँवों से जगें , घर आँगन के भाग जा बेटी परदेस जा, जुग-जुग जिये सुहाग घर आँगन में हर तरफ़, एक मधुर गुंजार - ShareChat