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#✍️ साहित्य एवं शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #📓 हिंदी साहित्य #✍मेरे पसंदीदा लेखक #❤️ प्यार की कहानियां
✍️ साहित्य एवं शायरी - साथ चलना नदी के दो किनारे कभी नहीं मिलते लेकिन साथ साथ चलते हैं ट्रेन की पटरियां भी कभी एक दूसरे से नहीं मिलतीं धरती और आसमान भी हैं पर कभी नहीं मिलते होते साथ साथ असल में यह लिखते हुए मैं लिखना चाहता हूं साथ चलना , मिलने से ज़्यादा बड़ी बात है _=0H.=!: साथ चलना नदी के दो किनारे कभी नहीं मिलते लेकिन साथ साथ चलते हैं ट्रेन की पटरियां भी कभी एक दूसरे से नहीं मिलतीं धरती और आसमान भी हैं पर कभी नहीं मिलते होते साथ साथ असल में यह लिखते हुए मैं लिखना चाहता हूं साथ चलना , मिलने से ज़्यादा बड़ी बात है _=0H.=!: - ShareChat