M P SINGH
कपूर के चमत्कारिक प्रभाव
कर्पूर या कपूर मोम की तरह उड़नशील दिव्य वानस्पतिक द्रव्य है। इसे अक्सर आरती के बाद या आरती करते वक्त जलाया जाता है जिससे वातावरण में सुगन्ध फैल जाती है और मन एवं मस्तिष्क को शान्ति मिलती है। कपूर को संस्कृत में कर्पूर, फारसी में काफूर और अंग्रेजी में कैंफर कहते हैं।
वास्तु एवं ज्योतिष शास्त्र में भी इसके महत्व और उपयोग के बारे में बताया गया है। कर्पूर के कई औषधि के रूप में भी कई फायदे हैं। इस लेख के माध्यम से हम जानेंगे कि कर्पूर या कपूर से आप कैसे अपनी परेशानी कम कर सकते हैं, और कैसे आप अपने ग्रह और घर को भी बाधा मुक्त रख सकते हैं।
कर्पूर जलाने की परम्परा प्राचीन समय से चली आ रही है। शास्त्रों के अनुसार देवी-देवताओं के समक्ष कर्पूर जलाने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। अत: प्रतिदिन सुबह और शाम घर में संध्यावन्दन के समय कर्पूर (कपूर) जरूर जलाएँ।
कर्पूर जलाने से देवदोष व पितृदोष का शमन होता है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि हमें शायद पितृदोष है या काल सर्पदोष है। दरअसल, यह राहु और केतु का प्रभाव मात्र है। इसको दूर करने के लिए घर के वास्तु को ठीक करें। यदि ऐसा नहीं कर सकते हैं तो प्रतिदिन सुबह, शाम और रात्रि को तीन बार घी में भिगोया हुआ कर्पूर जलाएँ। घर के शौचालय और बाथरूप में कर्पूर की 2-2 टिकियाँ रख दें। बस इतना उपाय ही काफी है।
आकस्मिक घटना या दुर्घटना का कारण राहु, केतु और शनि होते हैं। इसके अलावा हमारी तन्द्रा और क्रोध भी दुर्घटना का कारण बनते हैं। इसके लिए रात्रि में हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद कर्पूर जलाएँ। प्रतिदिन सुबह और शाम जिस घर में कर्पूर जलता रहता है, उस घर में किसी भी प्रकार की आकस्मिक घटना और दुर्घटना नहीं होती। रात्रि में सोने से पूर्व कर्पूर जलाकर सोना तो और भी लाभदायक है।
घर में यदि सकारात्मक ऊर्जा और शांति का निर्माण करना है तो प्रतिदिन सुबह और शाम कर्पूर को घी में भिगोकर जलाएँ और संपूर्ण घर में उसकी खुशबू फैलाएँ। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाएगी। दु:स्वप्न नहीं आएंगे और घर में अमन शान्ति बनी रहेगी है।
वैज्ञानिक शोधों से यह भी ज्ञात हुआ है कि इसकी सुगन्ध से जीवाणु, विषाणु आदि बीमारी फैलाने वाले जीव नष्ट हो जाते हैं जिससे वातावरण शुद्ध हो जाता है तथा बीमारी होने का भय भी नहीं रहता।
यदि घर के किसी स्थान पर वास्तु दोष निर्मित हो रहा है तो वहाँ कर्पूर की 2 टिकियां रख दें। जब वह टिकियाँ गलकर समाप्त हो जाएँ तब दूसरी दो टिकिया रख दें। इस तरह बदलते रहेंगे तो वास्तुदोष निर्मित नहीं होगा।
पानी में कर्पूर के तेल की कुछ बूँदों को डालकर नहाएँ। यह आपको तरोताजा तो रखेगा ही आपके भाग्य को भी चमकाएगा। यदि इस में कुछ बूँदें चमेली के तेल की भी डाल लेंगे तो इससे राहु, केतु और शनि का दोष नहीं रहेगा, लेकिन ऐसे सिर्फ शनिवार को ही करें।
रात्रि काल के समय रसोई समेटने के बाद चाँदी की कटोरी में लौंग तथा कपूर जला दिया करें। यह कार्य नित्य प्रतिदिन करेंगे तो धन-धान्य से आपका घर भरा रहेगा। धन की कभी कमी नहीं होगी।
🔥🌺जय जय श्री राधे🌹🏵️
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