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#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - वो जो राख बन गए उन्होंने जलती शमा को आजमाया होगा सब्र नहीं था उनमें इतना शायद इसलिए वक्त ने कहर बरपाया होगा मिट गए जो जुनून में सलीका उन्हें जीने का न आया होगा फकत हवाओं से की 'ತi दीयों ने फिर खुद को बुझाया होगा मंजिल की जल्दी थी इतनी कि रास्तों को भी ठुकराया होगा नसीब की क्या कहें उनकी अंजाम उन्होंने खुद ही बनाया होगा स्वाती छीपा. वो जो राख बन गए उन्होंने जलती शमा को आजमाया होगा सब्र नहीं था उनमें इतना शायद इसलिए वक्त ने कहर बरपाया होगा मिट गए जो जुनून में सलीका उन्हें जीने का न आया होगा फकत हवाओं से की 'ತi दीयों ने फिर खुद को बुझाया होगा मंजिल की जल्दी थी इतनी कि रास्तों को भी ठुकराया होगा नसीब की क्या कहें उनकी अंजाम उन्होंने खुद ही बनाया होगा स्वाती छीपा. - ShareChat