एक बोध कथा
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*एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में, एक वृद्ध किसान अपने एकलौते पुत्र के साथ रहता था। उनके स्वामित्व में एक छोटा सा खेत का टुकड़ा, एक गाय, और एक घोड़ा था।*
एक दिन उसका घोड़ा कहीं भाग गया। उन लोगों ने घोड़े को ढूँढने की बहुत कोशिश की पर घोड़ा नहीं मिला। किसान का पुत्र बहुत दुखी हो गया। वृद्ध किसान के पड़ोसी भी मिलने आये।
*गांववालों ने किसान को सांत्वना देने के लिए कहा, “ईश्वर आपके प्रति बहुत कठोर है, यह आपके साथ बहुत बुरा हुआ।”*
किसान ने शांत भाव से उत्तर दिया, “यह निश्चित रूप से ईश्वरीय कृपा है।”
*दो दिनों बाद घोड़ा वापस आ गया, लेकिन अकेला नहीं। चार अच्छे शक्तिशाली जंगली घोड़े भी उसके पीछे-पीछे आये। इस तरह से उस वृद्ध किसान के पास पांच घोड़े हो गए।*
लोगों ने कहा, “बहुत खूब। तुम तो बहुत भाग्यशाली हो।”
*बहुत ही सम भाव से कृतज्ञ होते हुए वृद्ध किसान ने कहा, “निश्चित रूप से यह भी ईश्वरीय कृपा है।”
उसका पुत्र बहुत उत्साहित हुआ। दूसरे ही दिन उसने एक जंगली घोड़े को जाँचने के लिए उसकी सवारी की, किन्तु घोड़े से वो गिर गया और उसका पैर टूट गया।*
पड़ोसियों ने अपनी बुद्धिमता दिखाते हुए कहा, “ये घोड़े अच्छे नहीं हैं। वो आपके लिए दुर्भाग्य लाये हैं, आखिरकार आपके पुत्र का पाँव टूट गया।”
*किसान ने उत्तर दिया, “यह भी उनकी कृपा है।”
कुछ दिनों बाद, राजा के अधिकारीगण गाँव में आवश्यक सैन्य सेवा हेतु युवकों को भर्ती करने के लिए आये। वे गाँव के सारे नवयुवकों को ले गए लेकिन टूटे पैर के कारण किसान के पुत्र को छोड़ दिया।*
कुढ़न और स्नेह से गांववालों ने किसान को बधाई दी कि उसका पुत्र जाने से बच गया।
*किसान ने कहा, “निश्चित रूप से यह भी उनकी ही कृपा है।”*
ये हमेशा ध्यान रखे के प्रभु कभी भी किसी का बुरा नही करते ना ही सोचते ॥ हुम जीव ऐसे है के हमेशा प्रभु को ही दोष देते है के हुम तो इतना भजन करते है सेवा करते है तब भी भगवान हमरे साथ एस करते है जब की ऐसी मिथ्या शौच जीव की होती है प्रभु पे विश्वास दृढ़ता और धेर्य रखने चहिये चाहिये । हमरे जीवन मे जो भी होत है वो हमारे कर्मों क हिसाब होता है चाहे अच्छा हो बुरा हो ये हमरी सोच है ॥
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#☝आज का ज्ञान


