-
212 212 212 212
युँ मुहब्बत में , ना आजमाया करो
दिल लगाया करो मान जाया करो
तिश्नगी पूछ आँखों से मेरी कभी
अश्क आँखों से युँ ना बहाया करो
फैल जाते है अंधेरे चारो तरफ
जुल्फ से ना युँ चहरा छुपाया करो
नूर ही नूर बस्ता है रुखसार पर
चाँद बनके मेरे दिल पे छाया करो
छल रही है तेरे प्यार की यादें अब
ख्वाब में आके ना युँ जगाया करो
कह सके ना फसाना जुबाँ से यहाँ
वो निगाहों से अपनी सुनाया करो
बा अदब सजदे में हम रहेंगे सदा
हर घड़ी बस यूं ही मुस्कराया करो
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
13/6/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी