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#शुभ मुहूर्त #पूजन विधि #व्रत एवं त्योहार
शुभ मुहूर्त - 15-06-26 मिथुन 7 संक्रान्ति सोमवार @a? महत्वपूर्ण धार्मिक पर्वों में से एक है, पंचांग के সক্কানি ক্কা এন अनुसार यह साल का तीसरा मास होता है। इस दिन सूर्य देव का वृषभ সিথুন ' संक्रांति भी राशि से मिथुन राशि में प्रवेश होता है, इसीलिए इसे है। इस संक्रांति के बाद वर्षा ऋतु का आगमन होता है। कहा जाता ऊँ घृणिः सूर्याय नमः . मिथुन संक्रान्तिः १५ जून २०२६, सोमवार संक्रान्ति क्षणः दोपहर १२:५9 बजे महापुण्यकालः दोपहर १२:५१ से ०३ः११ बजे तक मिथुन संक्रान्ति के दिन सूर्यदेव वृषभ राशि से मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं। संक्रान्ति और सूर्य उपासना के लिए विशेष पवित्र मानी जाती है। इसी समय से নিথি মান মান सूर्य पंचांग का मिथुन मास प्रारंभ होता है और प्रकृति वर्षा ऋतु की ओर बढ़ने लगती है। और थोड़ा गुड इस दिन प्रातः स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल, अक्षत, लाल पुष्प को अर्घ्य दें। श्रद्धा से "ऊँ घृणिः सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करें। अपनी सूर्यदेव ; रखकर क्षमता अनुसार जल, अन्न, फल, वस्त्र या गुड़ का दान करें। ओडिशा में इसी अवधि में राजा परबा की सुंदर परंपरा मनाई जाती है, जिसमें धरती और प्रकृति के प्रति सम्मान का भाव प्रकट होता है। भारतीय सनातन परंपरा में संक्रान्ति केवल ज्योतिषीय परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रकृति, समय और जीवन चक्र के प्रति सजगता का पर्व है। 15-06-26 मिथुन 7 संक्रान्ति सोमवार @a? महत्वपूर्ण धार्मिक पर्वों में से एक है, पंचांग के সক্কানি ক্কা এন अनुसार यह साल का तीसरा मास होता है। इस दिन सूर्य देव का वृषभ সিথুন ' संक्रांति भी राशि से मिथुन राशि में प्रवेश होता है, इसीलिए इसे है। इस संक्रांति के बाद वर्षा ऋतु का आगमन होता है। कहा जाता ऊँ घृणिः सूर्याय नमः . मिथुन संक्रान्तिः १५ जून २०२६, सोमवार संक्रान्ति क्षणः दोपहर १२:५9 बजे महापुण्यकालः दोपहर १२:५१ से ०३ः११ बजे तक मिथुन संक्रान्ति के दिन सूर्यदेव वृषभ राशि से मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं। संक्रान्ति और सूर्य उपासना के लिए विशेष पवित्र मानी जाती है। इसी समय से নিথি মান মান सूर्य पंचांग का मिथुन मास प्रारंभ होता है और प्रकृति वर्षा ऋतु की ओर बढ़ने लगती है। और थोड़ा गुड इस दिन प्रातः स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल, अक्षत, लाल पुष्प को अर्घ्य दें। श्रद्धा से "ऊँ घृणिः सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करें। अपनी सूर्यदेव ; रखकर क्षमता अनुसार जल, अन्न, फल, वस्त्र या गुड़ का दान करें। ओडिशा में इसी अवधि में राजा परबा की सुंदर परंपरा मनाई जाती है, जिसमें धरती और प्रकृति के प्रति सम्मान का भाव प्रकट होता है। भारतीय सनातन परंपरा में संक्रान्ति केवल ज्योतिषीय परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रकृति, समय और जीवन चक्र के प्रति सजगता का पर्व है। - ShareChat