Rajen drasingh
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13 जुलाई कश्मीर शहीद दिवस (Kashmir Martyrs' Day) 1931 में जम्मू-कश्मीर के इतिहास का एक ऐतिहासिक और दर्दनाक दिन है। इस दिन श्रीनगर सेंट्रल जेल के बाहर डोगरा महाराजा हरि सिंह की सेना ने 22 निहत्थे कश्मीरी मुसलमानों को तब गोलियों से भून दिया था, जब वे एक स्थानीय व्यक्ति, अब्दुल कादिर की अदालत की सुनवाई के दौरान शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे。घटना और शहादत से जुड़े मुख्य तथ्य:ऐतिहासिक कारण: यह घटना डोगरा शासन द्वारा कश्मीरी मुसलमानों पर किए जा रहे दमन और अत्याचारों के खिलाफ एक विद्रोह का परिणाम थी。अजान के दौरान गोलीबारी: जब भीड़ जेल के बाहर जुटी और नमाज के लिए 'अजान' शुरू हुई, तो डोगरा सेना ने गोलियां चला दीं। एक व्यक्ति के शहीद होने के बाद, दूसरे व्यक्ति ने अजान जारी रखी और उसे भी गोली मार दी गई। इस प्रकार, एक के बाद एक 22 लोग मारे गए。मजार-ए-शुहदा (Martyrs' Graveyard): इन सभी शहीदों के शवों को श्रीनगर के ख्वाजा बहाउद्दीन नक्शबंद साहिब के मकबरे के पास दफनाया गया था, जिसे अब 'मजार-ए-शुहदा' के नाम से जाना जाता है。सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व: इस दिन को कश्मीर में स्वतंत्रता और अन्याय के खिलाफ अदम्य साहस और प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता है。यह घटना विकिपीडिया कश्मीर आंदोलन में दर्ज है और उन बहादुर लोगों के बलिदान को याद करने के लिए इसे प्रतिवर्ष 13 जुलाई को कश्मीर सहित कई क्षेत्रों में सम्मान के साथ स्मरण किया जाता है。 #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें #🔴 क्राइम अपडेट #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #📹शॉर्ट अपडेट्स वीडियो 🎥 #📰 आपके निकट नौकरियाँ
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