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#sach ki bate #sach bate
sach ki bate - कभी कभी इंसान , ना टूटता है ना बिखरता है बस थक जाता है कभी खुद से कभी किस्मत से तो कभी अपनों से.. कभी कभी इंसान , ना टूटता है ना बिखरता है बस थक जाता है कभी खुद से कभी किस्मत से तो कभी अपनों से.. - ShareChat