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#☝ मेरे विचार #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #motivation #lifelesson #❤️जीवन की सीख
☝ मेरे विचार - !!समझदारी की सीखा! Follow/Sandhya Gupta एक दादी ने अपनी पोती से पूछा, "बेटा, तुम अपने पति का घर छोड़कर क्यों आ गईं? वह तो बहुत भला इंसान था। "पोती कांच के दो अलग-्अलग साइज के गिलास लेकर आई और बोली, " दादी , इस बड़े गिलास को इस छोटे गिलास के अंदर समाकर दिखाओ। "दादी ने कहा, "यह तो नामुमकिन है, ऐसा नहीं हो सकता। "तब पोती ने उस बड़े गिलास को फर्श पर पटक कर तोड़ दिया और उसके छोटे छोटे टुकड़े उस छोटे गिलास में भरते हुए कहा, "अगर मैं उस घर में रहती, तो मुझे भी अपने आत्मसम्मान और वजूद के ऐसे ही टुकड़े करने पड़ते। घुट-घुट कर जीने से तो अच्छा है कि इंसान अलग हो जाए। "दादी मुस्कुराईं और बोलीं, "ज़रा रुको।" फिर वह एक छोटा सा थैला और एक बड़ी रजाई लेकर आईं। उन्होंने पोती से कहा, "अब देखो कि यह बड़ी रजाई इस छोटे से थैले में कैसे आती है।" दादी ने बड़ी ही समझदारी से रजाई को धीरे ्धीरे मोड़ा , समेटा और आसानी से उस छोटे थैले के अंदर डाल दिया। फिर दादी ने पोती को समझाते हुए कहा, "जो इंसान कांच की तरह सख्त होता है, वह तालमेल नहीं बिठा पाता और बिखर जाता है। लेकिन जिसके व्यवहार में रजाई जैसा लचीलापन और समझदारी होती है, वह हर परिस्थिति में खुद को ढाल लेता है हिसाब से खुद को और बिखरने से बच जाता है। परिस्थितियों के संभालना ही इंसान का सबसे बड़ा गुण है।" !!समझदारी की सीखा! Follow/Sandhya Gupta एक दादी ने अपनी पोती से पूछा, "बेटा, तुम अपने पति का घर छोड़कर क्यों आ गईं? वह तो बहुत भला इंसान था। "पोती कांच के दो अलग-्अलग साइज के गिलास लेकर आई और बोली, " दादी , इस बड़े गिलास को इस छोटे गिलास के अंदर समाकर दिखाओ। "दादी ने कहा, "यह तो नामुमकिन है, ऐसा नहीं हो सकता। "तब पोती ने उस बड़े गिलास को फर्श पर पटक कर तोड़ दिया और उसके छोटे छोटे टुकड़े उस छोटे गिलास में भरते हुए कहा, "अगर मैं उस घर में रहती, तो मुझे भी अपने आत्मसम्मान और वजूद के ऐसे ही टुकड़े करने पड़ते। घुट-घुट कर जीने से तो अच्छा है कि इंसान अलग हो जाए। "दादी मुस्कुराईं और बोलीं, "ज़रा रुको।" फिर वह एक छोटा सा थैला और एक बड़ी रजाई लेकर आईं। उन्होंने पोती से कहा, "अब देखो कि यह बड़ी रजाई इस छोटे से थैले में कैसे आती है।" दादी ने बड़ी ही समझदारी से रजाई को धीरे ्धीरे मोड़ा , समेटा और आसानी से उस छोटे थैले के अंदर डाल दिया। फिर दादी ने पोती को समझाते हुए कहा, "जो इंसान कांच की तरह सख्त होता है, वह तालमेल नहीं बिठा पाता और बिखर जाता है। लेकिन जिसके व्यवहार में रजाई जैसा लचीलापन और समझदारी होती है, वह हर परिस्थिति में खुद को ढाल लेता है हिसाब से खुद को और बिखरने से बच जाता है। परिस्थितियों के संभालना ही इंसान का सबसे बड़ा गुण है।" - ShareChat