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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - SUNIL JAIN बुद्धिका सदुप।योग बुद्धिमान ।हित्वपूर्ण है होने केलिए म और केवल बुद्धि से काम नहीं चलत TI बुद्धि का  दुरुपयोग सदुपयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। बुद्धि के   दुरुपयोग का सबसे बड़ा उदाहरण का उदाहरण काकभुशुंडि हैं। रावण रावण है और बुद्धि के सदुपयोग  ब्राह्मण था, विश्व विजेता था, रा क्षसों का राजा था। लेकिन बुद्धि के मामले में गड़बड़ा गया। काकभु शुंडि पक्षी, और उसमें भी निकृष्ट कौवा, लेकिन बुद्धि का खूब उप योग किया। गरुड़ से उन्होंने कहा- सुनु खगेस रघुपति प्रभुताई, कह उं जथामति कथा  पक्षीराज सुहाई। मैं अपनी बुद्धि के अनुसार वह गरुड़ रघुनाथ जी की प्रभुता सुनि ऐै। बुद्धिपक अनुस्कर शब्द बड़े 30 कथा कहता हूं। सुहावनी महत्वपूर्ण हैं। ज्ञान के साथ समः झ पैदा हो तब बुद्धि कहलाती है। चार तरह की बुद्धि हैं- ಾತಷ್ और बुद्धि परिष्कृत हो तो प्रज्ञा है एसक्यू- सोच 4, ईक्यू- तार्किक सामाजिक भावनात्मक और एक्यू- एडवर्सिटी कोशेंट या॰नी चुनौतियों का सामना कैसे करें। बुद्धि थोड़ी अधिक सभी के पारप है, पर बुद्धिमान होने के लिए प्रयास करना पड़ता है।॰ Faceboo kPt. Vijayshankar Mehta SUNIL JAIN बुद्धिका सदुप।योग बुद्धिमान ।हित्वपूर्ण है होने केलिए म और केवल बुद्धि से काम नहीं चलत TI बुद्धि का  दुरुपयोग सदुपयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। बुद्धि के   दुरुपयोग का सबसे बड़ा उदाहरण का उदाहरण काकभुशुंडि हैं। रावण रावण है और बुद्धि के सदुपयोग  ब्राह्मण था, विश्व विजेता था, रा क्षसों का राजा था। लेकिन बुद्धि के मामले में गड़बड़ा गया। काकभु शुंडि पक्षी, और उसमें भी निकृष्ट कौवा, लेकिन बुद्धि का खूब उप योग किया। गरुड़ से उन्होंने कहा- सुनु खगेस रघुपति प्रभुताई, कह उं जथामति कथा  पक्षीराज सुहाई। मैं अपनी बुद्धि के अनुसार वह गरुड़ रघुनाथ जी की प्रभुता सुनि ऐै। बुद्धिपक अनुस्कर शब्द बड़े 30 कथा कहता हूं। सुहावनी महत्वपूर्ण हैं। ज्ञान के साथ समः झ पैदा हो तब बुद्धि कहलाती है। चार तरह की बुद्धि हैं- ಾತಷ್ और बुद्धि परिष्कृत हो तो प्रज्ञा है एसक्यू- सोच 4, ईक्यू- तार्किक सामाजिक भावनात्मक और एक्यू- एडवर्सिटी कोशेंट या॰नी चुनौतियों का सामना कैसे करें। बुद्धि थोड़ी अधिक सभी के पारप है, पर बुद्धिमान होने के लिए प्रयास करना पड़ता है।॰ Faceboo kPt. Vijayshankar Mehta - ShareChat