ShareChat
click to see wallet page
search
।। ॐ ।। भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया। त्वत्तः कमलपत्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम्।। क्योंकि हे कमलनेत्र! मैंने भूतों की उत्पत्ति और प्रलय को आपसे विस्तारपूर्वक सुना है तथा आपका अविनाशी प्रभाव भी सुना है। #यथार्थ गीता #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #❤️जीवन की सीख
यथार्थ गीता - 35 |/ 9 भवाप्ययौ हि भूतानां  विस्तरशो मया। श्रुतौ त्वत्तः कमलपत्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम्।। क्योंकि हे कमलनेत्र! मैंने भूतों की उत्पत्ति और प्रलय को आपसे विस्तारपूर्वक सुना है तथा आपका अविनाशी प्रभाव भी सुना है। 35 |/ 9 भवाप्ययौ हि भूतानां  विस्तरशो मया। श्रुतौ त्वत्तः कमलपत्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम्।। क्योंकि हे कमलनेत्र! मैंने भूतों की उत्पत्ति और प्रलय को आपसे विस्तारपूर्वक सुना है तथा आपका अविनाशी प्रभाव भी सुना है। - ShareChat