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#शुभ सोमवार
`रामेश्वर-स्थापना के #ॐ नमः शिवाय समय शिव-पार्वती के साक्षात् दर्शन`
`चित्र– स्कन्दपुराण, सेतु-माहात्म्य के अनुसार`
`स्तोत्र – पद्ममहापुराण , सृष्टिखण्ड ३५।१३९-१४७`
*॥ श्रीरामकृत महादेवस्तुति – सम्पूर्ण श्लोक व अर्थ ॥*
*नमस्ते देवदेवेश भक्तानामभयंकर ।*
*गौरीकान्त नमस्तुभ्यं दक्षयज्ञविनाशन ॥१३९॥*
`अर्थात 👉🏻 हे देवों के भी देव , भक्तों को अभय देने वाले ! हे गौरीपति , दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले ! आपको नमस्कार ।`
*नमः शर्वाय रुद्राय भवाय वरदाय च ।*
*पशूनां पतये नित्यं नित्यमुग्राय च कपर्दिने ॥१४०॥*
`अर्थात 👉🏻 हे शर्व , रुद्र , भव , वर देने वाले ! हे जीवों के स्वामी , सदैव उग्र रूप वाले , जटाधारी ! आपको नमस्कार ।`
*महादेवाय भीमाय त्र्यम्बकाय दिशाम्पते ।*
*ईशानाय भगघ्नाय नमोऽस्त्वन्धकघातिने ॥१४१॥*
`अर्थात 👉🏻 हे महादेव , भीम , तीन नेत्र वाले , दसों दिशाओं के स्वामी ! हे ईशान , भग का नाश करने वाले , अन्धकासुर का वध करने वाले ! आपको नमस्कार ।`
*नीलग्रीवाय भीमाय वेधसे वेधसा स्तुत ।*
*कुमारशत्रुनिघ्नाय कुमारजननाय च ॥१४२॥*
`अर्थात 👉🏻 हे नीलकण्ठ , भीम , ब्रह्मा द्वारा स्तुत ! हे तारकासुर के नाशक एवं कार्तिकेय के पिता ! आपको नमस्कार ।`
*विलोहिताय धूम्राय शिवाय क्रथनाय च ।*
*नमो नीलशिखण्डाय शूलिने दैत्यनाशिने ॥१४३॥*
`अर्थात 👉🏻 हे लाल तथा धूम्रवर्ण , कल्याणकारी , संहारक ! हे नीली शिखा वाले , त्रिशूलधारी , दैत्यों का नाश करने वाले ! आपको नमस्कार ।`
*उग्राय च त्रिनेत्राय हिरण्यवसुरेतसे ।*
*अचिन्त्यायाम्बिकाभर्त्रे सर्वदेवस्तुताय च ॥१४४॥*
`अर्थात 👉🏻 हे उग्र , त्रिनेत्र , स्वर्णिम तेज वाले ! हे अचिन्त्य , अम्बिकापति , समस्त देवों द्वारा स्तुत ! आपको नमस्कार ।`
*अभिगम्याय काम्याय सद्योजाताय वै नमः ।*
*वृषध्वजाय मुंडाय जटिने ब्रह्मचारिणे ॥१४५॥*
`अर्थात 👉🏻 हे सहज प्राप्त , मनोवांछित , सद्योजात ! हे वृषभध्वज , मुण्डमालाधारी , जटाधारी ब्रह्मचारी ! आपको नमस्कार ।`
*तप्यमानाय शान्ताय ब्रह्मण्याय जयाय च ।*
*विश्वात्मने विश्वसृजे विश्वमावृत्य तिष्ठते ॥१४६॥*
`अर्थात 👉🏻 हे तपस्वी , शान्त , वेदज्ञ ! हे विश्व की आत्मा , सृष्टिकर्ता , सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त !`
*नमो नमोस्तु दिव्याय प्रपन्नार्तिहराय च ।*
*भक्तानुकम्पिने देव विश्वतेजोमनोगते॥१४७॥*
`अर्थात 👉🏻 हे दिव्य , शरणागतों का दुःख हरने वाले ! आपको बारम्बार नमस्कार । हे भक्तों पर कृपा करने वाले देव , जो विश्व के तेज के रूप में सबके मन में विराजमान हैं !`
*॥ दिव्य भाव ॥*
`मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी ने वन में शिवलिंग स्थापित कर इसी स्तुति से महादेव को प्रसन्न किया था ।`
`इसीलिए इसे` *"रामेश्वर स्तुति"* `कहा जाता है ।`
`इस स्तुति में देवाधिदेव महादेव शिवजी के` *८ दिव्य स्वरूपों* `की वंदना है –`
*देवदेवेश , गौरीकान्त , पशुपति , त्र्यम्बक , अन्धकघातिन , वृषध्वज , विश्वात्मा औऱ प्रपन्नार्तिहर ।*
`एवं सर्वाधिक सुंदर पंक्ति है –`
*"""भक्तानुकम्पिने देव विश्वतेजोमनोगते"""*
`अर्थात 👉🏻 हे देव ! आप भक्तों पर कृपा करने वाले हैं तथा सम्पूर्ण विश्व के तेज के रूप में सबके मन में विराजमान हैं ।`
*जो प्रातःकाल इस स्तुति का पाठ करे , उसके जीवन से भय , दरिद्रता तथा रोग दूर होते हैं औऱ देवाधिदेव महादेव शिवजी की कृपा से दिवस मङ्गलमय हो जाता है ।*
`हर हर महादेव🔱`
`जय श्रीराम 🏹`
`जय रामेश्वर🚩`
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