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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - शिवतांडवस्तोत्रम जटाकटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि। ल्ललाटपट्टपावके धगद्धगद्धगज्ज्वल किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममः II2 Il {जिन शिव जी की जटाओं में अतिवेग से विलास पूर्वक रही देवी गंगा की लहरें उनके शीश पर लहरा रहीं भ्रमण कर हैं, जिनके मस्तक पर अग्नि की प्रचण्ड ज्वालायें धधक- धधक करके प्रज्वलित हो रहीं हैं, उन बाल चंद्रमा से विभूषित शिवजी में मेरा अनुराग प्रतिक्षण बढ़ता रहे।} शिवतांडवस्तोत्रम जटाकटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि। ल्ललाटपट्टपावके धगद्धगद्धगज्ज्वल किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममः II2 Il {जिन शिव जी की जटाओं में अतिवेग से विलास पूर्वक रही देवी गंगा की लहरें उनके शीश पर लहरा रहीं भ्रमण कर हैं, जिनके मस्तक पर अग्नि की प्रचण्ड ज्वालायें धधक- धधक करके प्रज्वलित हो रहीं हैं, उन बाल चंद्रमा से विभूषित शिवजी में मेरा अनुराग प्रतिक्षण बढ़ता रहे।} - ShareChat