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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - याद रखें कि कोई भी काम बिना बाधा के पूरा नहीं होता. सफलता उन्ही लोगों के कदम चूमती है जो अंत तक प्रयास करते है..!! याद रखें कि कोई भी काम बिना बाधा के पूरा नहीं होता. सफलता उन्ही लोगों के कदम चूमती है जो अंत तक प्रयास करते है..!! - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - मैँने ताले से सीखा है साथ निभाने का हुनर, वो टूट गया पर चाभी नहीं बदली ..!! मैँने ताले से सीखा है साथ निभाने का हुनर, वो टूट गया पर चाभी नहीं बदली ..!! - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं रातों से लड़़ना पड़ता है। जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं रातों से लड़़ना पड़ता है। - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - घायल परिंदा सा हूँ मैं, ना पंखे बचें ना हौसला फ़़िर भी आसमान छुने की ज़िद कर रहा हूं घायल परिंदा सा हूँ मैं, ना पंखे बचें ना हौसला फ़़िर भी आसमान छुने की ज़िद कर रहा हूं - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - शिवतांडवस्तोत्रम 3ঁ নম: থিনায शिवतांडवस्तोत्रम 3ঁ নম: থিনায - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - शिवतांडवस्तोत्रम जटाटवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले गलेडव लम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंग मालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् Il? Il {उनके बालों से बहने वाले जल से उनका कंठ पवित्र है, और उनके गले में सांप है जो हार की तरह लटका है, और डमरू से डमट् डमट् डमट् की ध्वनि निकल रही है, भगवान शिव शुभ तांडव नृत्य कर रहे हैं, वे हम सबको संपन्नता प्रदान करें।} शिवतांडवस्तोत्रम जटाटवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले गलेडव लम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंग मालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् Il? Il {उनके बालों से बहने वाले जल से उनका कंठ पवित्र है, और उनके गले में सांप है जो हार की तरह लटका है, और डमरू से डमट् डमट् डमट् की ध्वनि निकल रही है, भगवान शिव शुभ तांडव नृत्य कर रहे हैं, वे हम सबको संपन्नता प्रदान करें।} - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - शिवतांडवस्तोत्रम जटाकटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि। ल्ललाटपट्टपावके धगद्धगद्धगज्ज्वल किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममः II2 Il {जिन शिव जी की जटाओं में अतिवेग से विलास पूर्वक रही देवी गंगा की लहरें उनके शीश पर लहरा रहीं भ्रमण कर हैं, जिनके मस्तक पर अग्नि की प्रचण्ड ज्वालायें धधक- धधक करके प्रज्वलित हो रहीं हैं, उन बाल चंद्रमा से विभूषित शिवजी में मेरा अनुराग प्रतिक्षण बढ़ता रहे।} शिवतांडवस्तोत्रम जटाकटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि। ल्ललाटपट्टपावके धगद्धगद्धगज्ज्वल किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममः II2 Il {जिन शिव जी की जटाओं में अतिवेग से विलास पूर्वक रही देवी गंगा की लहरें उनके शीश पर लहरा रहीं भ्रमण कर हैं, जिनके मस्तक पर अग्नि की प्रचण्ड ज्वालायें धधक- धधक करके प्रज्वलित हो रहीं हैं, उन बाल चंद्रमा से विभूषित शिवजी में मेरा अनुराग प्रतिक्षण बढ़ता रहे।} - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - 46111 56111 2.25 @ 84% Vo 5.50 NR2 KBIs शिवतांडवस्तोत्रम् धरा-्धरेन्द्र नंदिनीविलास-बन्धु-बन्धुर स्फुर- द्दिगन्त सन्ततिप्रमोद ्मान-मानसे। कृपा-कटाक्ष धोरणी निरुद्ध दुर्धरापदि क्वचि द्दिगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि Il3 Il पर्वतराजसुता (पार्वती जी) के विलासमय रमणीय {जो कटाक्षों में परम आनन्दित चित्त रहते हैं, जिनके मस्तक में सृष्टि एवं प्राणीगण वास करते हैं, तथा जिनकी सम्पूर्ण  कृपादृष्टि मात्र से भक्तों की समस्त विपत्तियां दूर हो जाती हैं ऐसे दिगम्बर (आकाश को वस्त्र सामान धारण करने वाले) शिवजी की आराधना से मेरा चित्त सर्वदा आनन्दित रहे।} 46111 56111 2.25 @ 84% Vo 5.50 NR2 KBIs शिवतांडवस्तोत्रम् धरा-्धरेन्द्र नंदिनीविलास-बन्धु-बन्धुर स्फुर- द्दिगन्त सन्ततिप्रमोद ्मान-मानसे। कृपा-कटाक्ष धोरणी निरुद्ध दुर्धरापदि क्वचि द्दिगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि Il3 Il पर्वतराजसुता (पार्वती जी) के विलासमय रमणीय {जो कटाक्षों में परम आनन्दित चित्त रहते हैं, जिनके मस्तक में सृष्टि एवं प्राणीगण वास करते हैं, तथा जिनकी सम्पूर्ण  कृपादृष्टि मात्र से भक्तों की समस्त विपत्तियां दूर हो जाती हैं ऐसे दिगम्बर (आकाश को वस्त्र सामान धारण करने वाले) शिवजी की आराधना से मेरा चित्त सर्वदा आनन्दित रहे।} - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - 461 56+ 2.25 @ 84% Vo 30 lll mll NR2 KBIs शिवतांडवस्तोत्रम् जटा-भुजंग पिंगल स्फुरत्फणा ्मणिप्रभा कदम्ब-कुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्व-्धूमुखे मदान्ध सिन्धुर स्फुरत्त्व गुत्तरी यमे-दुरे मनो विनोदमद्भनुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ١١٧ ١١ {मैं उन शिवजी की भक्ति में आनन्दित रहूँ जो सभी प्राणियों के आधार एवं रक्षक हैं, जिनकी जटाओं में लिपटे सर्पों के फण की मणियों का प्रकाश पीले वर्ण प्रभा समूह रूप केसर के कान्ति से दिशाओं को प्रकाशित करते हैं और जो गजचर्म 4 faefa 81} 461 56+ 2.25 @ 84% Vo 30 lll mll NR2 KBIs शिवतांडवस्तोत्रम् जटा-भुजंग पिंगल स्फुरत्फणा ्मणिप्रभा कदम्ब-कुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्व-्धूमुखे मदान्ध सिन्धुर स्फुरत्त्व गुत्तरी यमे-दुरे मनो विनोदमद्भनुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ١١٧ ١١ {मैं उन शिवजी की भक्ति में आनन्दित रहूँ जो सभी प्राणियों के आधार एवं रक्षक हैं, जिनकी जटाओं में लिपटे सर्पों के फण की मणियों का प्रकाश पीले वर्ण प्रभा समूह रूप केसर के कान्ति से दिशाओं को प्रकाशित करते हैं और जो गजचर्म 4 faefa 81} - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - 461 56+ 2.25 @ 84% Vo 20 lll ~ull NR2 KBIs शिवतांडवस्तोत्रम् सहस्रलोचनप्रभृत्य-्शेष लेख-शेखर प्रसून- धूलि-्धोरणी विधू सरांघ्रि-पीठभूः भुजंगराज ्मालया निबद्ध जाटजूटकः श्रियै-चिराय ्जायतां चकोर-बन्धु-शेखरः IIqIl {जिन शिव जी के चरण देवताओं के मस्तक के पुष्पों की धूल से रंजित हैं (जिन्हें देवतागण अपने सर के पुष्प अर्पण करते हैं), जिनकी जटाओं में लाल सर्प लिए विराजमान है, वो चन्द्रशेखर हमें चिरकाल के सम्पदा दें ।} 461 56+ 2.25 @ 84% Vo 20 lll ~ull NR2 KBIs शिवतांडवस्तोत्रम् सहस्रलोचनप्रभृत्य-्शेष लेख-शेखर प्रसून- धूलि-्धोरणी विधू सरांघ्रि-पीठभूः भुजंगराज ्मालया निबद्ध जाटजूटकः श्रियै-चिराय ्जायतां चकोर-बन्धु-शेखरः IIqIl {जिन शिव जी के चरण देवताओं के मस्तक के पुष्पों की धूल से रंजित हैं (जिन्हें देवतागण अपने सर के पुष्प अर्पण करते हैं), जिनकी जटाओं में लाल सर्प लिए विराजमान है, वो चन्द्रशेखर हमें चिरकाल के सम्पदा दें ।} - ShareChat