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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - मैं हर बार सोचता रहा - "तुम समझोगे " और तुम हर बार साबित करते रहे -"मैं गलत हूँ"। मैं हर बार सोचता रहा - "तुम समझोगे " और तुम हर बार साबित करते रहे -"मैं गलत हूँ"। - ShareChat