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Vinod Kumar Yadav - Author on ShareChat
Vinod Kumar Yadav
528 views • 23 hours ago
#kavita#vinod yadav
तमिलनाडु की धरती पर, वीरन अलग मुथु चमके थे II अंग्रेजों की दास्ता न मानी , स्वाभिमान बन दमके थे Il फांसी के तख्ते को चूमा , पर शीश झुकाना न सीखा II  बिगुल 1 বরসা, হনিম্াম ২সা গনি নীস্ত্রা Il आजादी का पहला बुंदेलखंड की माटी में , आल्हा ऊदल की हुंकार उठी Il उधर ५२ युद्धों के जो विजेता , जिनकी तलवारों से झंकार उठी Il अहीर वीर वो धीरज महा, जिनकी गाथा जग गाया है पर क्यों इतिहास की किताबों में, नाम बहुत कम आता है Il लेखकः विनोद कुमार यादव तमिलनाडु की धरती पर, वीरन अलग मुथु चमके थे II अंग्रेजों की दास्ता न मानी , स्वाभिमान बन दमके थे Il फांसी के तख्ते को चूमा , पर शीश झुकाना न सीखा II  बिगुल 1 বরসা, হনিম্াম ২সা গনি নীস্ত্রা Il आजादी का पहला बुंदेलखंड की माटी में , आल्हा ऊदल की हुंकार उठी Il उधर ५२ युद्धों के जो विजेता , जिनकी तलवारों से झंकार उठी Il अहीर वीर वो धीरज महा, जिनकी गाथा जग गाया है पर क्यों इतिहास की किताबों में, नाम बहुत कम आता है Il लेखकः विनोद कुमार यादव
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    Vinod Kumar Yadav
    #kavita#vinod yadav
    एक कविता - विनोद कुमार यादव द्वारा (APoem - by Vinod Kumar Yadav) क्यूँ नहीं पढ़ाया बच्चों को , मिट्टी कितनी महान है ।l अहीर शौर्य की गाथा, , भारत देश की शान है ।। इतिहास भले ही चुप बैठे, , हमारा लहू गवाही देता है।। हर यादव का स्वाभिमान , अब अपना हक मांगेगा ।। उठाऊंगा , सबको सत्य बतााऊंगा ।। अब कलम जो दबा दिया गया पन्नों में , अब उसको ढूंढ के लाऊंगा माधव की गूंज से , फिर अरको लहराना है जय यादव जय शहीदों की गाथा , को बच्चों को पढ़ाना है ।। इन अभर लेखकः विनोद कुमार यादव एक कविता - विनोद कुमार यादव द्वारा (APoem - by Vinod Kumar Yadav) क्यूँ नहीं पढ़ाया बच्चों को , मिट्टी कितनी महान है ।l अहीर शौर्य की गाथा, , भारत देश की शान है ।। इतिहास भले ही चुप बैठे, , हमारा लहू गवाही देता है।। हर यादव का स्वाभिमान , अब अपना हक मांगेगा ।। उठाऊंगा , सबको सत्य बतााऊंगा ।। अब कलम जो दबा दिया गया पन्नों में , अब उसको ढूंढ के लाऊंगा माधव की गूंज से , फिर अरको लहराना है जय यादव जय शहीदों की गाथा , को बच्चों को पढ़ाना है ।। इन अभर लेखकः विनोद कुमार यादव
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    Vinod Kumar Yadav
    #kavita#vinod yadav
    20144ma maullc| வஞ {క్కైIRJ] ఖ] '@ಞತಿಸಹೊಕ'ೂ] ತ[ಕ] அபி HeS fafeiere RaHSTFquS 6HIRaid 5469<7 9[7<8 अन्धुकार कै छल गार् में गिरकर ಐಿತ್ವರರಸ್ತ ಣೊಾ೫ಟಹ இபிசிதி गौद ತತ[ತ} இஎி के भ्रात गए 46<3 नव ख्ुवुकौं कJ थविष्यु छीनकर सपने सारे जिल कर साख हुए अब भी समय है देश वास्ियनों अज्ञान की निद्रा से जागो ؟ कलम विचारों और शक्ति अपना सही अधिकार मांगो तवुख् Writer by, vinod kumor yadav 20144ma maullc| வஞ {క్కైIRJ] ఖ] '@ಞತಿಸಹೊಕ'ೂ] ತ[ಕ] அபி HeS fafeiere RaHSTFquS 6HIRaid 5469<7 9[7<8 अन्धुकार कै छल गार् में गिरकर ಐಿತ್ವರರಸ್ತ ಣೊಾ೫ಟಹ இபிசிதி गौद ತತ[ತ} இஎி के भ्रात गए 46<3 नव ख्ुवुकौं कJ थविष्यु छीनकर सपने सारे जिल कर साख हुए अब भी समय है देश वास्ियनों अज्ञान की निद्रा से जागो ؟ कलम विचारों और शक्ति अपना सही अधिकार मांगो तवुख् Writer by, vinod kumor yadav
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    पिता और भाई का घर छोड़कर आई II आँखों में नई उमंग लेकर नई दुनिया बसाई II ससुर ने बोला बहु नहीं बेटी है पाई ।I क्यों बोलते है झूठ जब निभा नहीं सकते II बहु को बेटी बना नहीं सकते II जब आपके कहने से बहु बेटी नहीं बनती II दिखावे से गृहस्थी नहीं चलती II कभी सोचा उसके माँ और भाई पर क्या बीतेगी II कभी सोचा अगर वो अपने माँ बाप भाई के संस्कार भूल जाये तुम पर क्या बीतेगी II Writer by , vinod kumar yadav पिता और भाई का घर छोड़कर आई II आँखों में नई उमंग लेकर नई दुनिया बसाई II ससुर ने बोला बहु नहीं बेटी है पाई ।I क्यों बोलते है झूठ जब निभा नहीं सकते II बहु को बेटी बना नहीं सकते II जब आपके कहने से बहु बेटी नहीं बनती II दिखावे से गृहस्थी नहीं चलती II कभी सोचा उसके माँ और भाई पर क्या बीतेगी II कभी सोचा अगर वो अपने माँ बाप भाई के संस्कार भूल जाये तुम पर क्या बीतेगी II Writer by , vinod kumar yadav
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    Vinod Kumar Yadav
    Kavita #kavita#vinod yadav
    Duniya me sb dekhakr bhi Dekho kaese soye hai Is bhagti doudati duniya me Hm khade akele roye hai Koi kitna bhi achha karle fir bhil Dekho inhe kaese schchai Se mukh mod rhe Dekho inhe kaese schchail Se mukh mod rhe Bebasi ka ye aalam hai ajab Be-khabar khushi dhoondhte hain ab लेखक (Writer) विनोद कुमार यादव Duniya me sb dekhakr bhi Dekho kaese soye hai Is bhagti doudati duniya me Hm khade akele roye hai Koi kitna bhi achha karle fir bhil Dekho inhe kaese schchai Se mukh mod rhe Dekho inhe kaese schchail Se mukh mod rhe Bebasi ka ye aalam hai ajab Be-khabar khushi dhoondhte hain ab लेखक (Writer) विनोद कुमार यादव
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    Vinod Kumar Yadav
    #kavita#vinod yadav
    जाग उठो देश वासियों (कविता ) महँगाई की मार बहुत है, जन जन आज बेहाल है पेट्रोल डीजल के दामों ने बिछा रक्खा जाल है आस्था के पावन धार्मों में, चौरी की वारदातें होती हैं परध्यान भटकाने कैे खातिर, नयी नीतियां रोती हैं अब ः्थैनॉल का दौर आ रहा , संकट भारी लाया है कहनैको तो ईघन विकल्प , पर र्संशय सब पर छाया है ३ साल मैं गाड़िया सारी , खँडहर बनाकर रह जार्येंगी देश भर की सड़कें जैसे , बर्बादी के गीत  सुनार्येंगी सोचो उस लाचार गरीब का, जिसने किस्त परणाड़ी ली पाई पाई जोड़कर जिसने , अपनी किस्मत सवारी थी रोजी रोटी छिन जायेगी { कर्ज का दानव खायेगा 0 बहुत सो चुके, अब तो होश में आओ तुम बर्बादी के डस मंजर पर, अपनी आवाज़ उठाओ तुम देशढलान परजा रहा है, अबती आर्खे खीललो हककैखातिर सचकै खातिर जय हिन्दकहकरबीलली जियहिन्दईकलाबर्जिंदाबाद लैखकः विनीद यादव जाग उठो देश वासियों (कविता ) महँगाई की मार बहुत है, जन जन आज बेहाल है पेट्रोल डीजल के दामों ने बिछा रक्खा जाल है आस्था के पावन धार्मों में, चौरी की वारदातें होती हैं परध्यान भटकाने कैे खातिर, नयी नीतियां रोती हैं अब ः्थैनॉल का दौर आ रहा , संकट भारी लाया है कहनैको तो ईघन विकल्प , पर र्संशय सब पर छाया है ३ साल मैं गाड़िया सारी , खँडहर बनाकर रह जार्येंगी देश भर की सड़कें जैसे , बर्बादी के गीत  सुनार्येंगी सोचो उस लाचार गरीब का, जिसने किस्त परणाड़ी ली पाई पाई जोड़कर जिसने , अपनी किस्मत सवारी थी रोजी रोटी छिन जायेगी { कर्ज का दानव खायेगा 0 बहुत सो चुके, अब तो होश में आओ तुम बर्बादी के डस मंजर पर, अपनी आवाज़ उठाओ तुम देशढलान परजा रहा है, अबती आर्खे खीललो हककैखातिर सचकै खातिर जय हिन्दकहकरबीलली जियहिन्दईकलाबर्जिंदाबाद लैखकः विनीद यादव
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