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#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - मतलब के यार से ना यारी भली जो आए बिन समझौते से उस दिलदार की मेहरबानी बढी फरेब के हथियार की ना आरी चली जो मिला खुदा के दरबार से उस इमान की मेरे लिए ख़ुद्दारी बढ़ी चाल शतरंज की ना भारी पढ़ी जो रखा बचा कर मात से उस मोहरे पर रब की इनायत बढ़ी सूखे पतझड़ मे ना डाली झडी जो आई रुत बहार से उस शाख पर एक एक पात बढी शूल कण्टक की ना आह भरी जो लगा मलहम प्रेम से उस दवा पर दुआ की असर बढी सूरत पर ना सीरत की मूरत गढ़ी जो परख ले एक नज़र से 'ঐথুসাৎ' उस कुन्दन की ' శ్గ ఇడే जोर आजमाइश ना खुशामद चली जो खडा सच बिन अवलम्बन से उस झूठ की इजलास मे ना पैरवी बढ़ी बस मेहनत की ना हुड़दंग मची जो मिला मुक्कदर मेरे काम से उस नाम की तो चहुंओर शान बढ़ी स्वाती छीपा मतलब के यार से ना यारी भली जो आए बिन समझौते से उस दिलदार की मेहरबानी बढी फरेब के हथियार की ना आरी चली जो मिला खुदा के दरबार से उस इमान की मेरे लिए ख़ुद्दारी बढ़ी चाल शतरंज की ना भारी पढ़ी जो रखा बचा कर मात से उस मोहरे पर रब की इनायत बढ़ी सूखे पतझड़ मे ना डाली झडी जो आई रुत बहार से उस शाख पर एक एक पात बढी शूल कण्टक की ना आह भरी जो लगा मलहम प्रेम से उस दवा पर दुआ की असर बढी सूरत पर ना सीरत की मूरत गढ़ी जो परख ले एक नज़र से 'ঐথুসাৎ' उस कुन्दन की ' శ్గ ఇడే जोर आजमाइश ना खुशामद चली जो खडा सच बिन अवलम्बन से उस झूठ की इजलास मे ना पैरवी बढ़ी बस मेहनत की ना हुड़दंग मची जो मिला मुक्कदर मेरे काम से उस नाम की तो चहुंओर शान बढ़ी स्वाती छीपा - ShareChat