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अब धूप को परछाईयों से मत डराईए, लेकरके आईने को बाहर तो आईए। मासूम से चेहरे पर नाज़ुक से वो हालात, अब प्यार से निकाल जहाँ को दिखाईए। #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - अब धूप को परछाईयों से मत डराईए, लेकरके आईने को बाहर तो आइए। मासूम से चेहरे पर नाजुक से वो हालात, अब प्यार से निकाल जहाँ को दिखाईए। महेन्द्र नारायण 7 अब धूप को परछाईयों से मत डराईए, लेकरके आईने को बाहर तो आइए। मासूम से चेहरे पर नाजुक से वो हालात, अब प्यार से निकाल जहाँ को दिखाईए। महेन्द्र नारायण 7 - ShareChat