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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - 00 নানানী ম. 000000 कुछ लोगों को सिर पर बिठा रखे थे हकीकत सामने आई तो. पैरों के पास बिठाने लायक नहीं थे 130 00 নানানী ম. 000000 कुछ लोगों को सिर पर बिठा रखे थे हकीकत सामने आई तो. पैरों के पास बिठाने लायक नहीं थे 130 - ShareChat