ShareChat
click to see wallet page
search
#*આપણે વિચારીશું ખરા?* #islam guide us in every field of life #*let us understand our religion #सोचने वाली बात #points to ponder
*આપણે વિચારીશું ખરા?* - संदेशवाहक (मुआज़) को वह तौफ़ीक़ दी जिससे अल्लाह का रसूल खुश है।" जामी अत-तिर्मिज़ीः १३२७ (ज़ईफ़/कमज़ोर सनद, लेकिन इसका अर्थ सही है) ३. तीसरी हदीस (Third Hadith) अब्दुर रहमान बिन अबू बकरा से रिवायत है कि उनके पिता (अबू बकरा) ने उबैदुल्लाह बिन अबू बकरा को (जो सिजिस्तान के काज़ी।जज थे) लिखवायाः "तुम दो लोगों के बीच गुस्से की हालत में फैसला मत करना , क्योंकि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को यह फ़रमाते हुए सुना हैः 'तुम में से कोई भी व्यक्ति दो लोगों के बीच गुस्से की हालत में फैसला न 45</'" सहीह मुस्लिमः १७१७ a संदेशवाहक (मुआज़) को वह तौफ़ीक़ दी जिससे अल्लाह का रसूल खुश है।" जामी अत-तिर्मिज़ीः १३२७ (ज़ईफ़/कमज़ोर सनद, लेकिन इसका अर्थ सही है) ३. तीसरी हदीस (Third Hadith) अब्दुर रहमान बिन अबू बकरा से रिवायत है कि उनके पिता (अबू बकरा) ने उबैदुल्लाह बिन अबू बकरा को (जो सिजिस्तान के काज़ी।जज थे) लिखवायाः "तुम दो लोगों के बीच गुस्से की हालत में फैसला मत करना , क्योंकि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को यह फ़रमाते हुए सुना हैः 'तुम में से कोई भी व्यक्ति दो लोगों के बीच गुस्से की हालत में फैसला न 45</'" सहीह मुस्लिमः १७१७ a - ShareChat