कुरआन और बाइबल के गहन ज्ञान के आधार पर संत रामपाल जी महाराज समझाते हैं कि भगवान/अल्लाह के नाम पर जीव की गर्दन काटना धर्म नहीं, बल्कि अज्ञानता और कुप्रथा है। यह कृत्य मनुष्य को पापी कसाई की श्रेणी में खड़ा करता है।कबीर साहेब और संत गरीबदास जी महाराज के अनुसार, हिंदू और मुसलमान दोनों का मार्ग दया और अहिंसा से ही सिद्ध होता है। किसी भी जीव की गर्दन काटना कुफर (पाप) है।
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