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#तऊ न मेरे अघ अवगुन गनिहैं।
तऊ न मेरे अघ अवगुन गनिहैं। - तिऊंभ मेरे अघ अवगुन गनिहैं। जौ जमराज काज सब परिहरि इहै ख्याल उर अनिहैं१।१ चलिहैं छूटि, पुंज पापिनके असमंजस जिय जनिहैं। देखि खलल अधिकार प्रभूसों , मेरी भूरि भलाई ೩faII? Il 327 हँसि करिहिं परतीत भक्तकी भक्त सिसेमनि ज्यों त्यों तुलसीदास कोसलपति अपनायहिपर fa/3II तिऊंभ मेरे अघ अवगुन गनिहैं। जौ जमराज काज सब परिहरि इहै ख्याल उर अनिहैं१।१ चलिहैं छूटि, पुंज पापिनके असमंजस जिय जनिहैं। देखि खलल अधिकार प्रभूसों , मेरी भूरि भलाई ೩faII? Il 327 हँसि करिहिं परतीत भक्तकी भक्त सिसेमनि ज्यों त्यों तुलसीदास कोसलपति अपनायहिपर fa/3II - ShareChat