Akshay Jamdagni
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🚩 पूजा करते समय भूलकर भी न करें ये 31 गलतियाँ, वरना पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलेगा | By Akshay Jamdagni 🙏 हर सनातनी को अवश्य जानने चाहिए पूजा-साधना के ये महत्वपूर्ण शास्त्रीय नियम शास्त्रों में पूजन के लिए धूप का उल्लेख अधिक मिलता है, जबकि आधुनिक अगरबत्ती का उल्लेख प्राचीन वैदिक पूजन-विधान में सामान्यतः नहीं मिलता। अनेक आचार्यों का मत है कि रासायनिक (केमिकल युक्त) तथा बांस आधारित अगरबत्तियों की अपेक्षा प्राकृतिक धूप, गुग्गुल, लोबान अथवा हवन सामग्री का प्रयोग अधिक सात्त्विक और शास्त्रसम्मत माना जाता है। इसी कारण अनेक विद्वान पूजा में प्राकृतिक धूप के प्रयोग की सलाह देते हैं। श्रद्धालुओं को भी इस विषय में जागरूक होना चाहिए तथा यथासंभव प्राकृतिक धूप का प्रयोग करना चाहिए। 🙏 आइए जानते हैं पूजा-साधना से जुड़े 31 महत्वपूर्ण शास्त्रीय नियम। 🕉️ पूजा-साधना के 31 महत्वपूर्ण नियम 👉 1. गणेशजी को तुलसी पत्र छोड़कर सभी पत्र प्रिय हैं। भैरव पूजा में तुलसी का प्रयोग नहीं किया जाता। 👉 2. कुंद का पुष्प माघ मास को छोड़कर भगवान शिव को अर्पित नहीं करना चाहिए। 👉 3. बिना स्नान किए तुलसी पत्र नहीं तोड़ना चाहिए। 👉 4. रविवार के दिन दूर्वा नहीं तोड़नी चाहिए। 👉 5. भगवान शिव को केतकी का पुष्प अर्पित नहीं करना चाहिए। 👉 6. कार्तिक मास में भगवान विष्णु को केतकी का पुष्प अर्पित करना शुभ माना गया है। 👉 7. देवताओं के समक्ष प्रज्वलित दीपक को स्वयं नहीं बुझाना चाहिए। 👉 8. शालिग्राम का आवाहन और विसर्जन नहीं किया जाता। 👉 9. स्थापित मूर्ति में पुनः आवाहन और विसर्जन नहीं होता। 👉 10. तुलसी पत्र का संग्रह मध्याह्न के बाद नहीं करना चाहिए। 👉 11. पूजा के समय गुरुदेव या पूज्य व्यक्ति आएँ तो उन्हें प्रणाम कर उनकी आज्ञा से शेष पूजा पूर्ण करें। 👉 12. मिट्टी की मूर्ति का आवाहन और विसर्जन शास्त्रीय विधि से किया जाता है। 👉 13. कमल, बिल्वपत्र और तुलसी पत्र निश्चित अवधि तक शुद्ध करके पुनः प्रयोग किए जा सकते हैं। 👉 14. पंचामृत उपलब्ध न हो तो केवल दूध से अभिषेक करने पर भी पुण्य प्राप्त होता है। 👉 15. शालिग्राम पर सामान्य अक्षत नहीं चढ़ाए जाते। 👉 16. हाथ में धारण किए पुष्प, तांबे के पात्र में रखा चंदन तथा चमड़े के पात्र में रखा गंगाजल अपवित्र माना गया है। 👉 17. पिघला हुआ घृत तथा अत्यधिक पतला चंदन अर्पित नहीं करना चाहिए। 👉 18. एक दीपक से दूसरा दीपक जलाना तथा दीपक से अगरबत्ती जलाना कई परंपराओं में अशुभ माना गया है। 👉 19. द्वादशी, संक्रांति, रविवार, पक्षांत तथा संध्याकाल में तुलसी पत्र नहीं तोड़ना चाहिए। 👉 20. प्रतिदिन की पूजा में सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा अवश्य अर्पित करें। 👉 21. आसन, शयन, दान, भोजन, वस्त्र धारण, विवाद तथा विवाह के समय छींक शुभ मानी गई है। 👉 22. मलिन वस्त्र पहनकर अथवा अशुद्ध अवस्था में जप-पूजन नहीं करना चाहिए। 👉 23. रात्रि एवं प्रदोषकाल में मिट्टी, गोबर तथा गोमूत्र का संग्रह नहीं करना चाहिए। 👉 24. मूर्ति स्नान कराते समय अंगूठे से मूर्ति को नहीं रगड़ना चाहिए। 👉 25. पीपल वृक्ष को दोपहर के समय नमस्कार करना श्रेष्ठ माना गया है। 👉 26. जहाँ विद्वानों का अनादर होता है, वहाँ अनिष्ट की संभावना बताई गई है। 👉 27. पौष शुक्ल दशमी, चैत्र शुक्ल पंचमी तथा श्रावण पूर्णिमा पर लक्ष्मी पूजन शुभ माना गया है। 👉 28. कृष्ण पक्ष, रिक्ता तिथि तथा श्रवणादि नक्षत्रों में लक्ष्मी पूजन नहीं करना चाहिए। 👉 29. अपराह्न, रात्रि, कृष्ण पक्ष, द्वादशी तथा अष्टमी में लक्ष्मी पूजन प्रारंभ नहीं करना चाहिए। 👉 30. यज्ञ मंडप सम एवं संतुलित होना चाहिए। 👉 31. शास्त्रोक्त विधि से निर्मित एवं सुसज्जित यज्ञकुंड को ही शुभ माना गया है। 🌺 निष्कर्ष सनातन धर्म में पूजा केवल श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि शास्त्रसम्मत विधि का भी विषय है। यदि हम इन नियमों का पालन करें तो पूजा अधिक सात्त्विक, अनुशासित और फलदायी मानी जाती है। 🙏 यदि यह जानकारी उपयोगी लगी हो तो इसे अपने परिवार, मित्रों और सभी सनातन प्रेमियों के साथ अवश्य साझा करें। 🕉️ Astro Vastu Kosh By Akshay Jamdagni #astrovastukosh #akshayjamdagni #sanatandharma #hindudharma #poojavidhi #dharma #bhakti #jyotish #vastu #spirituality #hinduism #viralpost #❤️जीवन की सीख #astrovastukosh #🙏 माँ वैष्णो देवी #🙏शाम की आरती🪔
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