ShareChat
click to see wallet page
search
#✍️ साहित्य एवं शायरी #💌शब्द से शायरी: दिल🖤 #💕दिल की💕बात 💕दिल से💕दिल तक💕अल्फाज ए मुहब्बत 💕( आर-दत्ता)😘😟 #🧿🧚‍♀️🎯❣️अल्फाजों की दुनियां जहाँ _सिर्फ तुम हो_नये ज़ज्बात_नये_अल्फाज के साथ _{लव शायरी}❣️🎯🧚‍♀️ #📖 कविता और कोट्स✒️
✍️ साहित्य एवं शायरी - कभी ख़ामोशी के साए में , खुद को ढूंढता हूँ मैं, कभी दिल के बंद कमरों में , कई दस्तकें सुनता हूँ मैं। है मैंने , उस एक पल के इंतज़ार में, गुज़ारी एक उम्र जो कभी मेरा था ही नहीं, उसे ढूँढता रहा इकरार में। हाँ, बात कुछ यूँ है... कि शिकवे तो बहुत हैं इस ज़माने से, से ही कर बैठा हूँ । मगर शिकायत खुद जो राहें कभी मंज़िल तक जाती ही नहीं थीं, उन्हीं राहों से अक्सर मैं हाल-एनदिल कहता हूँ। कभी सोचा था कि भूल जाऊँगा वो गुज़रा हुआ कल, वो भीगी भीगी सी बारिशें , वो सुलगता हुआ पल। मगर जब भी कलम उठाई, पन्नों पर इक नाम आ गया, जैसे हर दर्द का मुकद्दर बनकर कोई सलाम आ गया। लोग कहते हैं कि वक्त हर ज़ख्म को भर देता है, मगर ये वक्त भी तो यादों का ज़हर देता है। इश्क़ अगर गुनाह है, तो सज़ा भी लाज़मी है, बेगुनाह हैं जो, उन्हें भी कहाँ दर्द की कमी है। खैर, अब कोई गिला नहीं , अब कोई मलाल नहीं , इस बेताब दिल में अब कोई सवाल नहीं | ये जो स्याही बह रही है, ये लहू है मेरे अरमानों का, तहरीर नहीं , जनाज़ा है जाने कितने दीवानों का। ये महज़ आखिर में , दिल को बस यही कहकर बहला लेता हूँ, 1. किस्मत वालों को मिलता है प्यार के बदले प्यार! किसी के हिस्से मंज़िल ए-पनाह,किसी के हिस्से इंतज़ार। | 8०e 9o8 [ कभी ख़ामोशी के साए में , खुद को ढूंढता हूँ मैं, कभी दिल के बंद कमरों में , कई दस्तकें सुनता हूँ मैं। है मैंने , उस एक पल के इंतज़ार में, गुज़ारी एक उम्र जो कभी मेरा था ही नहीं, उसे ढूँढता रहा इकरार में। हाँ, बात कुछ यूँ है... कि शिकवे तो बहुत हैं इस ज़माने से, से ही कर बैठा हूँ । मगर शिकायत खुद जो राहें कभी मंज़िल तक जाती ही नहीं थीं, उन्हीं राहों से अक्सर मैं हाल-एनदिल कहता हूँ। कभी सोचा था कि भूल जाऊँगा वो गुज़रा हुआ कल, वो भीगी भीगी सी बारिशें , वो सुलगता हुआ पल। मगर जब भी कलम उठाई, पन्नों पर इक नाम आ गया, जैसे हर दर्द का मुकद्दर बनकर कोई सलाम आ गया। लोग कहते हैं कि वक्त हर ज़ख्म को भर देता है, मगर ये वक्त भी तो यादों का ज़हर देता है। इश्क़ अगर गुनाह है, तो सज़ा भी लाज़मी है, बेगुनाह हैं जो, उन्हें भी कहाँ दर्द की कमी है। खैर, अब कोई गिला नहीं , अब कोई मलाल नहीं , इस बेताब दिल में अब कोई सवाल नहीं | ये जो स्याही बह रही है, ये लहू है मेरे अरमानों का, तहरीर नहीं , जनाज़ा है जाने कितने दीवानों का। ये महज़ आखिर में , दिल को बस यही कहकर बहला लेता हूँ, 1. किस्मत वालों को मिलता है प्यार के बदले प्यार! किसी के हिस्से मंज़िल ए-पनाह,किसी के हिस्से इंतज़ार। | 8०e 9o8 [ - ShareChat