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#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - काटों से यारी कर ली फूलों से दुश्वारी कर ली क्या खूब चतुराई करी बंदे ने आप ही चोट आप ही तलवार कर ली बस्ती को फूंकने की उसने खुद ही तैयारी कर ली अंगारों से प्रीत लगाई ऐसी आप ही आग आप ही चिंगारी कर ली गैरों से क्या शिकवा करना अपनों से ही गद्दारी कर ली फरेब का ऐसा ताना बाना बुना आप ही मुंसिफ़ आप ही गुनहगारी कर ली मंजिल की चाह छोड़ कर काले साए से वफ़ादारी कर ली अंधेरों के उस मुसाफिर ने आप ही रात आप ही बेदारी कर ली मोहब्बत का ढोंग रचाकर नफ़रत की ज़मीं भारी करली दिल तोड़ने के इस खेल में उसने आप ही दर्द आप ही आह॰ओ ज़ारी कर ली स्वाती छीपा काटों से यारी कर ली फूलों से दुश्वारी कर ली क्या खूब चतुराई करी बंदे ने आप ही चोट आप ही तलवार कर ली बस्ती को फूंकने की उसने खुद ही तैयारी कर ली अंगारों से प्रीत लगाई ऐसी आप ही आग आप ही चिंगारी कर ली गैरों से क्या शिकवा करना अपनों से ही गद्दारी कर ली फरेब का ऐसा ताना बाना बुना आप ही मुंसिफ़ आप ही गुनहगारी कर ली मंजिल की चाह छोड़ कर काले साए से वफ़ादारी कर ली अंधेरों के उस मुसाफिर ने आप ही रात आप ही बेदारी कर ली मोहब्बत का ढोंग रचाकर नफ़रत की ज़मीं भारी करली दिल तोड़ने के इस खेल में उसने आप ही दर्द आप ही आह॰ओ ज़ारी कर ली स्वाती छीपा - ShareChat