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#poems #poetry #feeling ##️⃣DilShayarana💘 #moj_content
poems - कभी यूँ खुद को देख लगता है जैसे. मैं यूँ हर पल उदास क्यों रहती हूँ, क्यों सोचती हूँ इतना... हर छोटी बात को दिल से लगा लेती हूँ, अपनी ही सोचों में खुद को सज़ा देती हूँ । खामोशी में भी एक शोर सा रहता है, चेहरे पर मुस्कान मगर 31డ कुछ टूटता रहता है। खुद को कष्ट देने में आनंद आता है क्या मुझे? या बस दर्द से रिश्ता पुराना हो गया है मुझे... कभी यूँ खुद को देख लगता है जैसे. मैं यूँ हर पल उदास क्यों रहती हूँ, क्यों सोचती हूँ इतना... हर छोटी बात को दिल से लगा लेती हूँ, अपनी ही सोचों में खुद को सज़ा देती हूँ । खामोशी में भी एक शोर सा रहता है, चेहरे पर मुस्कान मगर 31డ कुछ टूटता रहता है। खुद को कष्ट देने में आनंद आता है क्या मुझे? या बस दर्द से रिश्ता पुराना हो गया है मुझे... - ShareChat