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#GodMorningThursday कबीर, सुख के माथे पत्थर पड़ो, जो नाम हृदय से जाय। बलिहारी वा दुःख के, जो पल-पल राम रटाय॥ भावार्थ :- हे परमात्मा ! इतना सुख भी ना देना जिससे तेरी भूल पड़े। जिस दुःख से परमात्मा की पल-पल याद बनी रहे, वैसे दुःख सदा देते रहना। #jagatguru santrampal ji mahraj
jagatguru santrampal ji mahraj - क्ची२ कबीर, सुख के माथे पत्थर पड़ो, जो नाम हृदय से जाय बलिहारी वा दुःख के, जो पलः्पल राम रटाय Il भावार्थ इतना सुख भी ना देना हे परमात्मा जिससे तेरी भूल पडे़े। जिस दुःख से परमात्मा की पल-्पल याद बनी रहे, वैसे दुःख सदा देते रहना। जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी मह्याराज Sat Kabir' supremesod.or8 SatKabirVachan  -SatKabirVachan001 Vachan क्ची२ कबीर, सुख के माथे पत्थर पड़ो, जो नाम हृदय से जाय बलिहारी वा दुःख के, जो पलः्पल राम रटाय Il भावार्थ इतना सुख भी ना देना हे परमात्मा जिससे तेरी भूल पडे़े। जिस दुःख से परमात्मा की पल-्पल याद बनी रहे, वैसे दुःख सदा देते रहना। जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी मह्याराज Sat Kabir' supremesod.or8 SatKabirVachan  -SatKabirVachan001 Vachan - ShareChat