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jai Singh Dass
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1 दिन पहले
#सत_भक्ति_संदेश
वाणी बिन उपदेश अचम्भ है, क्यों जिवत हैं प्राण। भक्ति बिना कहाँ ठौर है, ये नर नाहीं पाषाण।। भावार्थ:- परमात्मा कबीर जी कह रहे हैं कि हे भोले मानव ! मुझे आश्चर्य है कि बिना गुरू से दीक्षा लिए किस आशा को लेकर जीवित है।
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