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#सत_भक्ति_संदेश वाणी बिन उपदेश अचम्भ है, क्यों जिवत हैं प्राण। भक्ति बिना कहाँ ठौर है, ये नर नाहीं पाषाण।। भावार्थ:- परमात्मा कबीर जी कह रहे हैं कि हे भोले मानव ! मुझे आश्चर्य है कि बिना गुरू से दीक्षा लिए किस आशा को लेकर जीवित है।
सत_भक्ति_संदेश - =0 AUHDA वाणी बिन उपदेश अचम्भ है, क्यों जिवत हैं प्राण। भक्ति बिना कहाँ ठौर है, ये नर नाहीं पाषाण। | भावार्थः- परमात्मा कबीर जी कह रहे हैंकि हे भोले मानव! मुझे आश्चर्य हैकि बिना गुरू से दीक्षा लिए किस आशा को लेकर जीवित है।न तो शरीर तेरा है यहभी त्यागकर जाएगा। फिर सम्पत्ति आपकी कैसे है२ जिनको यह विवेक नहीं किभक्ति बिना जीव का कहीं भी ठिकाना नहीं है तो वे नर यानि मानव नहीं हैंवे तो पत्थर हैं। बुद्धि पर पत्थर गिरे हैंl उनकी संत रामपाल जी महाराज Follow us Oni 540A5DOUH SAMUNDKADELHI SADELHIMUNDKA =0 AUHDA वाणी बिन उपदेश अचम्भ है, क्यों जिवत हैं प्राण। भक्ति बिना कहाँ ठौर है, ये नर नाहीं पाषाण। | भावार्थः- परमात्मा कबीर जी कह रहे हैंकि हे भोले मानव! मुझे आश्चर्य हैकि बिना गुरू से दीक्षा लिए किस आशा को लेकर जीवित है।न तो शरीर तेरा है यहभी त्यागकर जाएगा। फिर सम्पत्ति आपकी कैसे है२ जिनको यह विवेक नहीं किभक्ति बिना जीव का कहीं भी ठिकाना नहीं है तो वे नर यानि मानव नहीं हैंवे तो पत्थर हैं। बुद्धि पर पत्थर गिरे हैंl उनकी संत रामपाल जी महाराज Follow us Oni 540A5DOUH SAMUNDKADELHI SADELHIMUNDKA - ShareChat