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वाल्मीकि रामायण का अनसुना प्रसंग, जब मारीच ने रावण को सीता हरण से रोक दिया था : वाल्मीकि रामायण के अनुसार सीता हरण की कथा में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि खर-दूषण और १४००० राक्षसों के वध का समाचार सबसे पहले शूर्पणखा ने नहीं, बल्कि अकम्पन्न नामक राक्षस ने रावण को दिया था। उसी ने रावण को बताया कि श्री राम ने अकेले ही जनस्थान का विनाश कर दिया है और उनके पराक्रम का वर्णन करते हुए कहा कि उन्हें युद्ध में परास्त करना असंभव है। अकम्पन्न ने ही पहली बार रावण को यह सलाह दी कि यदि किसी प्रकार माता सीता का हरण कर लिया जाए, तो उनके वियोग में श्री राम जीवित नहीं रहेंगे। यह सुनकर रावण मारीच के पास पहुँचा और उससे सहायता माँगी किन्तु मारीच ने रावण को कठोर शब्दों में समझाया कि श्री राम से वैर लेना विनाश को बुलाना है। उसने कहा कि जो व्यक्ति सीता हरण की सलाह दे रहा है, वह वास्तव में रावण का शत्रु है। मारीच के समझाने पर रावण उस समय अपना विचार छोड़कर लंका लौट गया। इसके बाद जब शूर्पणखा लंका पहुँची और उसने भी सीता हरण के लिए रावण को उकसाया, तब दूसरी बार रावण मारीच की सहायता से पंचवटी गया और माता सीता का हरण किया। इस प्रसंग से हमें ज्ञात होता है कि खर-दूषण के वध का समाचार सबसे पहले अकम्पन्न ने दिया था। सीता हरण की पहली सलाह भी अकम्पन्न ने ही दी थी। मारीच ने प्रारम्भ में रावण को इस कार्य से रोक दिया था। रावण पहली बार सीता हरण का विचार त्यागकर वापस लौट गया था। 🙏 जय श्री राम 🙏 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - मन का संशय मिट गया, सुनि मारीच विचार। भाग्य विवश फिर भी हुआ, असुर वंश संहारIl  जब रावण माता सीता का अपहरण किये बिना ही लौट गया F मन का संशय मिट गया, सुनि मारीच विचार। भाग्य विवश फिर भी हुआ, असुर वंश संहारIl  जब रावण माता सीता का अपहरण किये बिना ही लौट गया F - ShareChat