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#भक्ति
🤹सनत्कुमार का हठ और ब्रह्मा जी का 'दायाद' (पुत्रों के प्रकार) का उपदेश:
🛐ऋषि पुलस्त्य जी कहते हैं— हे नारद जी! जब ब्रह्मा जी (पितामह) ने सनत्कुमार से कुछ बात कही, तो तपस्वी सनत्कुमार ने उनसे कहा, "हे देव! मैं तीन बार सत्य की सौगंध खाकर कहता हूँ कि मैं आपका ही पुत्र हूँ। इसलिए आप मुझे योग (परमात्मा से जुड़ने के मार्ग) का उपदेश दीजिए।"
उनकी यह बात सुनकर महायोगी ब्रह्मा जी मुस्कुराए और बोले, "पुत्र! अगर तुम्हारे माता-पिता तुम्हें मुझे सौंप दें, तब तो तुम कानूनी और धार्मिक रूप से मेरे 'दायाद' (यानी संपत्ति और वंश के असली हकदार) पुत्र बन जाओगे।"🛐
🧘इस पर सनत्कुमार ने पूछा, "भगवान! आपने जो यह 'दायाद' शब्द इस्तेमाल किया है, इसका असल में मतलब क्या होता है? कृपया मुझे इसके बारे में विस्तार से समझाइए।"🧘
🕉️ब्रह्मा जी हंसते हुए बोले, "वत्स! ध्यान से सुनो। शास्त्रों के अनुसार पुत्रों के कई प्रकार होते हैं। पहले छह पुत्र ऐसे होते हैं जो असली दायाद (वारिस) और बंधु माने जाते हैं:🕉️
1 औरस: जो अपनी ही वैध पत्नी से पैदा हुआ खुद का सगा बेटा हो (यह पिता का ही रूप माना जाता है)।
2 क्षेत्रज: अगर पति नपुंसक, पागल या किसी गंभीर बीमारी/व्यसन से लाचार हो, तो उसकी मर्जी से उसकी पत्नी द्वारा (नियमों के तहत) पैदा किया गया पुत्र।
3 दत्तक: जिसे माता-पिता ने किसी दूसरे को गोद दे दिया हो।
4 कृत्रिम: किसी दोस्त के बेटे को या दोस्त द्वारा दिए गए बेटे को अपना मान लेना।
5 गूढ़ोत्पन्न: जो घर में ही पैदा हुआ हो, पर यह पक्का न पता हो कि उसे किसने जन्म दिया है।
6 अपविद्ध: माता-पिता द्वारा छोड़ दिए गए किसी बच्चे को बाहर से लाकर अपना बेटा बना लेना।
🚩महत्व: ब्रह्मा जी ने बताया कि ये छह प्रकार के पुत्र ही माता-पिता को कर्ज (ऋण) से मुक्ति दिलाते हैं, उनका पिंडप्रदान (श्राद्ध) करते हैं, धन-संपत्ति के हकदार होते हैं, गोत्र को आगे बढ़ाते हैं और कुल की प्रतिष्ठा बनाए रखते हैं।🚩
🕉️इसके बाद ब्रह्मा जी ने अगले छह प्रकार के पुत्रों के बारे में बताया, जो सिर्फ नाम के बंधु होते हैं:
1 कानीन: कुंवारी लड़की के गर्भ से पैदा हुआ बेटा।
2 सहोढ़: जो लड़की शादी के वक्त पहले से गर्भवती हो, उससे विवाह के बाद पैदा होने वाला बच्चा।
3 क्रीट: पैसों से खरीदा हुआ बेटा।
4 पौनर्भव: किसी स्त्री की पहली शादी टूट जाने या पति के छोड़ने के बाद, दूसरी शादी से पैदा हुआ बेटा।
5 स्वयंदत्त: जो बच्चा अकाल या किसी मजबूरी के कारण खुद को किसी दूसरे को सौंप दे।
6 पारशव: किसी ब्राह्मण पुरुष द्वारा शूद्र जाति की विवाहित या अविवाहित स्त्री से पैदा किया गया बेटा।
🚩महत्व: इन आखिरी छह पुत्रों से माता-पिता का पिंड या ऋण का कार्य नहीं होता। ये समाज में केवल नाम के पुत्र होते हैं और कुल-गोत्र में इन्हें मुख्य स्थान नहीं मिलता।🚩
🕉️ब्रह्मा जी ने सनत्कुमार से कहा, पुत्र! नियमों के अनुसार तुम खुद को सीधे मुझे नहीं सौंप सकते। इसलिए जाओ और अपने माता-पिता को बुलाकर लाओ।
ब्रह्मा जी की आज्ञा पाकर सनत्कुमार ने अपने माता-पिता का ध्यान किया। उनके माता-पिता और कोई नहीं, बल्कि 'धर्म' और 'अहिंसा' थे। वे दोनों तुरंत वहां प्रकट हुए और ब्रह्मा जी को प्रणाम करके बैठ गए।
तब सनत्कुमार ने उनसे कहा, पिताजी, माताजी! मैं ब्रह्मा जी से योग की शिक्षा लेना चाहता हूँ। इन्होंने मुझ से कहा है कि पहले मैं इनका पुत्र बनूँ। इसलिए आप दोनों मुझे इन्हें दान कर दीजिए।🕉️
👩❤️👩अपने बेटे की इच्छा जानकर उन दोनों योगाचार्यों (धर्म और अहिंसा) ने ब्रह्मा जी से कहा, "प्रभु! आज से हमारा यह बेटा आपका हुआ। हम इसे आपको सौंपते हैं। इतना कहकर वे जिस रास्ते से आए थे, उसी रास्ते से वापस चले गए।👩❤️👩
!!जय श्री कृष्णा!!