My Bite
603 views 4 days ago
"अदा" ●●●●●● 🌹🌱🌾 नई नवेली अजब अठखेली, तब से मन भरमाया है। नही रहा हूँ होश मे मै, जब से तुमको पाया है। दिल-मन किनारे पता नही, एकाएक कहाँ से आइ तुम। मैं देखता पिछे को था, और सामने से टकराइ तुम। समझ पाता जबतक कुछ भी, गुस्से मे मुँह खोल पड़ी। मेरी नजर भले पिछे थी, और गलती मेरी है बोल पड़ी। ये अदा ना देखा था, लिया फाँस मे ऐसे जकड़। मै सोचता जबतक कुछ भी, तिरछी बातों मे लिया पकड़।1। दिन हीन दिखने लगा, और दया ना फिर आई तुम्हे। ठेठ हृदय के इस पंक्षी पे, बिजली ऐसे गिराइ प्रिय। कभी तोर से कभी जोर से, मुझको यूँ धमाके लगी। लगा जैसे मै मुजरिम हूँ, और तुम शब्द बाण बरसाने लगी। मेरा मन दंग रहा फिर, समझ मे कुछ ना आया। हे विधाता क्या हुआ, ये कहाँ मुझे फँसाया। मन ही मन उलझा रहा, बक बक भी सुनता रहा। प्रभु क्षमा करो भी अब, ये मन ही मन कहता रहा।2। कहा अनाड़ी फिरते हो, ना जाने कहाँ से आए तुम। सारे लड़के एक ही होते, जानबूझ ही टकराए तुम। तभी समझ मे आया कुछ, ये लड़की कुछ भरमाती है। नजर चुराकर पिछले को, कुछ अजीब तरह मुसकाती है। कभी ताव मे आती है, कभी नर्म बन जाती है। अगर बुरा हूँ इतना तो, ये छोर क्यों नही जाती है। उसकी सहेली को देखा जब, मैने तब कुछ जान लिया। इस गोरी को कही देखा है, मन ही मन पहचान लिया।3। मन मे आया तब कुछ यूँ, कुछ प्रसाद इसे दे देता हूँ। बहुत तंग कर चुकी है ये, दो थाप इसे जर देता हूँ। बहुत चाहा पर दिल भी, कभी हाँ नही कर पाया। हरबार सा एकबार फिर से, मैं ये उपकार नही कर पाया। कहाँ हुआ आज तक ये कि, पुरुष नारी से शर्माया है। पर सच ये भी तो है कि, पुरुष नारी से भरमाया है। उसकी मुस्कान के आगे युँ, मै भी फिर तब टूट गया। चलो जाव हटो भी अब, कहके सबकुछ भूल गया।4। तभी देखा दोनो को ही, कुछ बात थी जो मुस्काने लगी। मुझे देख देख कर फिर क्यों, बड़े जोर खिलखिलाने लगी। हाय समझ मे आया तभी, ये ढोंग बना एक झोंका है। उल्लु बना रही थी तब से, ये चंचलता का एक धोखा है। ये भाव क्यों ना समझ पाया, आखिर मै भी धँस हीं गया। बड़ा उड़ता फिरता था, आज यहाँ फँस हीं गया। क्या कहुँ मै क्या करूँ, सर को तब खुजलाने लगा। ना समझ आया कुछ तो, फिर उन्ही के संग मुस्काने लगा।5। पता नही क्यों फिर हम, साथ साथ ही चलने लगे। क्या हुआ जो एकदुजे को, नजरों से कुछ कहने लगे। धन्य धन्य हे उपर वाले, ये कोमलता भी बड़ी मस्तानी है। दिल बोलता हार मानकर, ये अदा भी बड़ी निराली है। झलक पलक के साथ से ही, ये अजीब एहसास कराती है। एक क्षण के समय साथ से, कितना प्रित छलकाती है। बहुत हुआ सो वहाँ से अब, घर को अपने आने लगे। नजर के बातों से आखिर। दोनो ही मुस्काने लगे।6। फिर जब भी मिलती कही, सखियों संग इठलाती है। मै वहाँ ना कर पाता कुछ, वो तिर चला मुस्काती है। लोग बोलते बात है क्या? आखिर कैसे ये बरसात हुई। तू तो बड़ा उड़ता रहता था, फिर ये मौसम क्यों मेहरबान हुई? अब मैं क्या कहुँ अपनों को, कि दिल ही दिल घबराता हूँ। समझ नही आता है कुछ, और अपने को भरमाता हूँ। क्या कहुँ मै प्रिय तुमसे, ये कैसे मुझे उलझाया है। नही रहा हूँ होश मे पगली, जब से तुमको पाया है।7। जब से तुमको..............💕💞 .........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒 🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳 #💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
13 likes
9 shares

More like this