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ख़ुद पर यक़ीन गिरकर सँभलना ही सफ़र की रीत कहलाती है, हर शब के आँचल से सहर मुस्कुराती है। राहों की दुश्वारियाँ चाहे लाख़ चुनौती दें, हौसलों की लौ ही मंज़िल तक पहुँचाती है। मंज़िल उन्हीं के क़दमों को चूमती है अक्सर, जो थककर भी रुकने की रस्म नहीं निभाते हैं। वक़्त की हर आज़माइश एक सबक़ बन जाती है, सब्र की दौलत ही इंसाँ को कामयाबी दिलाती है। जब ख़्वाब आँखों में हों और इरादे फ़ौलादी, तक़दीर भी फिर अपना फ़ैसला बदल जाती है। हार को स्वीकार कर जो फिर उठ खड़ा होता है, वही असल मायनों में फ़तह का हक़दार होता है। इतिहास के पन्नों पर नाम यूँ ही नहीं लिखे जाते, हर सफलता के पीछे संघर्ष का समंदर होता है। "ओमराजे" अपनी क़लम से यही संदेश लिखते हैं— ख़ुद पर यक़ीन रखो, हर सपना मुकम्मल होता है। --- — ओमराजे आर्टिस्ट (ओमराजे देशमुख आर्टिस्ट) लेखक | कवि | साहित्यकार © COPYRIGHT 2026 OMRAJE ARTIST & OMRAJE DESHMUKH ARTIST सर्वाधिकार सुरक्षित | All Rights Reserved प्रेरक संदेश: "मेहनत इतनी ख़ामोशी से करो कि सफलता स्वयं तुम्हारा परिचय दुनिया से कराए।" . . . . . . ##ओमराजे_आर्टिस्ट #हिंदी_ग़ज़ल #हिंदी_कविता #प्रेरणा #मोटिवेशन #संघर्ष #सफलता #हौसला #ख़ुद_पर_यक़ीन ##ओमराजे आर्टिस्ट हिंदी ग़ज़ल ✍️ #Omraje Artist ✍️ #Omraje Author #Omraje Deshmukh Artist
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