nastik
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#🎓जनरल नॉलेज के एक मन्दिर में प्रभु जगन्नाथ का डॉक्टरों द्वारा पत्थर की मूर्तियों का स्टेथोस्कोप से चेकअप किए जाने का दृश्य कई गंभीर सवाल खड़े करता है यदि MBBS डॉक्टर स्वयं ऐसे प्रतीकात्मक अनुष्ठानों में अपने चिकित्सकीय उपकरणों का उपयोग करते हैं, तो इससे आम जनता में वैज्ञानिक चिकित्सा और धार्मिक आस्था के बीच भ्रम पैदा होता है। डॉक्टर का दायित्व विज्ञान, तर्क और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा का प्रतिनिधित्व करना है ऐसे में यदि कोई चिकित्सक अपने पेशे की विश्वसनीयता का उपयोग ऐसे कार्यों में करता है, जिन्हें लोग वास्तविक चिकित्सा के रूप में समझ सकते हैं, तो यह वैज्ञानिक सोच को कमजोर करने वाला संदेश देता है। पत्रकार वेद प्रकाश की मांग है कि अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले ऐसे डॉक्टरों के आचरण की मेडिकल काउंसिल को गंभीरता से जांच करनी चाहिए और यदि किसी पेशेवर आचार संहिता का उल्लंघन पाया जाए तो नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। आस्था हर व्यक्ति का व्यक्तिगत अधिकार है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान का आधार आस्था नहीं, बल्कि प्रमाण और वैज्ञानिक पद्धति है यही कारण है कि इस तरह की घटनाएँ समाज में अंधविश्वास और पाखण्ड को बढ़ावा देती हैं।
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