jai Singh Dass
#सत_भक्ति_संदेश
कबीर, यह संसार है मूंढ का, जो समझे नहिं बात।
काल जाल में फँस रहा, दिन-रात पछतात ।।'
अर्थात कबीर साहेब जी समझा रहे हैं यह संसार अज्ञानतावश काल (ब्रह्म) के जाल में फँसा हुआ है। मनुष्य विषय-विकारों और झूठी सुख-सुविधाओं में उलझकर अपना अनमोल मनुष्य जिवन व्यर्थ गंवा रहा है।