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##️⃣DilShayarana💘 #feeling #poems #poetry #sad life
#️⃣DilShayarana💘 - भ्रम में हैं लोग जो आए हैं गंगा नहाने, आरती देखने, उन्हीं लोगों में एक मैं भी हूँ । फर्क बस इतना है कि उन्हें अपना भ्रम दिखता नहीं, और मैं उसे पहचानकर भी छोड़ नहीं पाती हूँ। में डुबकी लगाकर पाप धोने का वे जल विश्वास आए हैं, লিব मैं अपने भीतर की मैल को लेकर किनारे पर खड़ी हूँ। वे मुक्ति की आशा में हाथ जोड़ते हैं, और मैं अपने ही प्रश्नों के आगे नतमस्तक हूँ। उनकी आस्था उन्हें सुकून देती है, मेरा सच मुझे चैन से रहने नहीं देता। वे जो खोज रहे हैं, शायद पा भी लें, मैं जो खोज रही हूँ, उसका नाम तक नहीं जानती। गंगा बह रही है.. सबको एक॰सा स्पर्श करती हुई, बिना यह पूछे कि कौन पापी है,॰ कौन पुण्यात्मा।  fu मैं ही हूँ जो अपने भीतर दीवारें खडी 48& R अपने ही बनाए हुए बंधनों में कैद। भ्रम में वे भी हैं, शायद ####/ और शायद भ्रम अंतर केवल इतना है कि वे अपने भ्रम के साथ सहज हैं, और मैं उसे पहचानकर भी उससे प्रेम करती हूँ, इसलिए छोड़ नहीं पाती हूँ। भ्रम में हैं लोग जो आए हैं गंगा नहाने, आरती देखने, उन्हीं लोगों में एक मैं भी हूँ । फर्क बस इतना है कि उन्हें अपना भ्रम दिखता नहीं, और मैं उसे पहचानकर भी छोड़ नहीं पाती हूँ। में डुबकी लगाकर पाप धोने का वे जल विश्वास आए हैं, লিব मैं अपने भीतर की मैल को लेकर किनारे पर खड़ी हूँ। वे मुक्ति की आशा में हाथ जोड़ते हैं, और मैं अपने ही प्रश्नों के आगे नतमस्तक हूँ। उनकी आस्था उन्हें सुकून देती है, मेरा सच मुझे चैन से रहने नहीं देता। वे जो खोज रहे हैं, शायद पा भी लें, मैं जो खोज रही हूँ, उसका नाम तक नहीं जानती। गंगा बह रही है.. सबको एक॰सा स्पर्श करती हुई, बिना यह पूछे कि कौन पापी है,॰ कौन पुण्यात्मा।  fu मैं ही हूँ जो अपने भीतर दीवारें खडी 48& R अपने ही बनाए हुए बंधनों में कैद। भ्रम में वे भी हैं, शायद ####/ और शायद भ्रम अंतर केवल इतना है कि वे अपने भ्रम के साथ सहज हैं, और मैं उसे पहचानकर भी उससे प्रेम करती हूँ, इसलिए छोड़ नहीं पाती हूँ। - ShareChat