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#*આપણે વિચારીશું ખરા?* #सोचने वाली बात #points to ponder #Qur'an and We #*let us understand our religion
*આપણે વિચારીશું ખરા?* - Qur'an 57/20 यह दुनिया की "जान रखो कि ज़िंदगी इसके सिवा कुछ नहीं कि एक खेल और तमाशा है, और (बाहरी) ज़ीनत (सजावट) है, और तुम्हारा आपस में एक-दूसरे पर फ़ख़्र (घमंड) करना है, और माल और औलाद (बच्चों) में एक-दूसरे से आगे बढ़ जाने की कोशिश है। इसकी मिसाल ऐसी है जैसे एक > बारिश हो, जिससे उगने वाली खेती किसार्नों को बहुत भली (अच्छी) எி8 fxas புகஎளி8 फिर तुम उसे देखते हो कि वह पीली पड़ जाती है, फिर वह भूसा (सूखा तिनका) बनकर रह जाती है। और आख़िरत (परलोक) में > लिए) (नाफ़रमानों के স ঔড়ান (सज़ा) है और (अल्लाह की तरफ़ से) मग़फ़िरत (माफ़ी) और उसकी रज़ामंदी है। और की ज़िंदगी दुनिया धोखे के सामान के सिवा कुछ भी नहीं।" Qur'an 57/20 यह दुनिया की "जान रखो कि ज़िंदगी इसके सिवा कुछ नहीं कि एक खेल और तमाशा है, और (बाहरी) ज़ीनत (सजावट) है, और तुम्हारा आपस में एक-दूसरे पर फ़ख़्र (घमंड) करना है, और माल और औलाद (बच्चों) में एक-दूसरे से आगे बढ़ जाने की कोशिश है। इसकी मिसाल ऐसी है जैसे एक > बारिश हो, जिससे उगने वाली खेती किसार्नों को बहुत भली (अच्छी) எி8 fxas புகஎளி8 फिर तुम उसे देखते हो कि वह पीली पड़ जाती है, फिर वह भूसा (सूखा तिनका) बनकर रह जाती है। और आख़िरत (परलोक) में > लिए) (नाफ़रमानों के স ঔড়ান (सज़ा) है और (अल्लाह की तरफ़ से) मग़फ़िरत (माफ़ी) और उसकी रज़ामंदी है। और की ज़िंदगी दुनिया धोखे के सामान के सिवा कुछ भी नहीं।" - ShareChat