#जय श्री राम #जय हनुमान
बिन हनुमंत राम नहीं गाथा, भक्त शिरोमणि कपि कुल नाथा
इसका अर्थ है कि हनुमान जी के बिना भगवान श्री राम की कथा अधूरी है। हनुमान जी वानर कुल के स्वामी हैं और उन्हें भक्तों में सर्वोपरि (भक्त शिरोमणि) माना गया है। श्री राम के चरित्र और उनकी महिमा का गान हनुमान जी के वर्णन के बिना संभव ही नहीं है।
जहाँ जहाँ रघुनाथ पधारा, तहँ तहँ कपि कर प्रेम अपारा
इन पंक्तियों में कहा गया है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जहाँ-जहाँ भी गए या जिन-जिन स्थानों पर उन्होंने कदम रखे, वहाँ-वहाँ हनुमान जी का असीम और निश्छल प्रेम हमेशा उनके साथ रहा। यह श्री राम के प्रति हनुमान जी की अटूट निष्ठा और निरंतर उपस्थिति को प्रकट करता है।
संक्षेप में: यह पंक्तियाँ स्पष्ट करती हैं कि जहाँ श्री राम हैं, वहाँ हनुमान जी का वास निश्चित है और इन दोनों को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता।


