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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - रेत और विश्वास सूखी जैसे सूखी रेत मुठ्ठी से निकल जाती है, जैसे धागा टूट जाने पर मोती  बिखर जाते हैं, ठीक वैसे ही पर रिश्ते संभल नहीं विश्वास टूटने पाते इसलिए रिश्तों को शब्दों से नहीं अपने व्यवहार से जोड़कर li" Good morning ऊळ H 0 ^03 रेत और विश्वास सूखी जैसे सूखी रेत मुठ्ठी से निकल जाती है, जैसे धागा टूट जाने पर मोती  बिखर जाते हैं, ठीक वैसे ही पर रिश्ते संभल नहीं विश्वास टूटने पाते इसलिए रिश्तों को शब्दों से नहीं अपने व्यवहार से जोड़कर li" Good morning ऊळ H 0 ^03 - ShareChat