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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - कीआ देहि सलाईओ नैणी भावका करि सीगारो।ता सोहागणि जाणीऐ लागी जा सहुधरे पिआरो ग मै तेरा हे भाई! आमतौर पर आँखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए काजल लगाया जाता है, लेकिन यहाँ आँखों में भय परमात्मा के प्रति भिखारी श्रद्धा और आदर भाव की सलाई डालो। यहां डर संसार का डर नहीं है, बल्कि यह बोध है कि वह परमशक्ति हमेशा हमारे साथ जिओ है।जब आँखों में यह मर्यादा होती है, तो इंसान बुरा देखने से बच जाता है। परमात्मा के प्रति असली श्रृंगार गहने कपड़े नहीं बल्कि प्रेम और समर्पण है। ईश्वर की भक्ति में जब तक हृदय में प्रेम का पहाडा भाव न हो, तब तक सारे कर्मकांड व्यर्थ हैं। प्रेम ही वह तत्व है वाले जो आत्मा को निखारता है। सच्ची सुहागन वह आत्मा जो परमात्मा से जुड़ी है वही मानी जाती है, जिस पर सहु पति-परमेश्वर अपना प्रेम बरसाते हैं। बाबा इंसान चाहे जितनी भी पूजा पाठ या दिखावा कर ले, सार्थकता तभी है जब वह प्रेम परमात्मा द्वारा स्वीकार कर लिया जाए। जा यानी, जब आत्मा और परमात्मा के बीच अहंकार की दीवार गिर जाती है और केवल प्रेम शेष रहता है। कीआ देहि सलाईओ नैणी भावका करि सीगारो।ता सोहागणि जाणीऐ लागी जा सहुधरे पिआरो ग मै तेरा हे भाई! आमतौर पर आँखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए काजल लगाया जाता है, लेकिन यहाँ आँखों में भय परमात्मा के प्रति भिखारी श्रद्धा और आदर भाव की सलाई डालो। यहां डर संसार का डर नहीं है, बल्कि यह बोध है कि वह परमशक्ति हमेशा हमारे साथ जिओ है।जब आँखों में यह मर्यादा होती है, तो इंसान बुरा देखने से बच जाता है। परमात्मा के प्रति असली श्रृंगार गहने कपड़े नहीं बल्कि प्रेम और समर्पण है। ईश्वर की भक्ति में जब तक हृदय में प्रेम का पहाडा भाव न हो, तब तक सारे कर्मकांड व्यर्थ हैं। प्रेम ही वह तत्व है वाले जो आत्मा को निखारता है। सच्ची सुहागन वह आत्मा जो परमात्मा से जुड़ी है वही मानी जाती है, जिस पर सहु पति-परमेश्वर अपना प्रेम बरसाते हैं। बाबा इंसान चाहे जितनी भी पूजा पाठ या दिखावा कर ले, सार्थकता तभी है जब वह प्रेम परमात्मा द्वारा स्वीकार कर लिया जाए। जा यानी, जब आत्मा और परमात्मा के बीच अहंकार की दीवार गिर जाती है और केवल प्रेम शेष रहता है। - ShareChat