sn vyas
#जय श्री कृष्ण
" सखूबाई "
सासू और पति का अत्याचारसंत 'सखूबाई' का विवाह कराड (महाराष्ट्र) के एक ऐसे परिवार में हुआ था जहाँ उनके सास, ससुर और पति भगवान विठ्ठल की भक्ति के सख्त खिलाफ थे। वे सखूबाई से दिन-रात घर का भारी काम करवाते, उन्हें भूखा रखते और शारीरिक व मानसिक रूप से बहुत प्रताड़ित करते थे।
इन सब अत्याचारों के बावजूद सखूबाई हमेशा शांत रहकर विठ्ठल नाम का जाप करती रहती थीं।पंढरपुर जाने की इच्छा और खंभे से बांधनाएक बार आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर पंढरपुर जाने वाले वारकरियों (भक्तों) की एक टोली उनके गाँव से गुजरी। कीर्तन और विठ्ठल नाम का जयघोष सुनकर सखूबाई के मन में भगवान के दर्शन की तीव्र व्याकुलता जाग उठी। जब उन्होंने अपने ससुराल वालों से पंढरपुर जाने की अनुमति मांगी, तो उन्होंने साफ मना कर दिया। सखूबाई के बार-बार मिन्नतें करने पर क्रोधित होकर उनके पति और सास ने उन्हें रस्सी से एक लकड़ी के खंभे (स्तंभ) से मजबूती से बांध दिया और कमरे में बंद कर दिया ताकि वह भाग न सकें।भगवान विठ्ठल का प्रकट होना और रूप बदलनाअत्यधिक पीड़ा और बंधन में जकड़े होने के बावजूद सखूबाई ने रोते हुए अपने करुण स्वर में भगवान विठ्ठल को पुकारा। अपने भक्त की आर्त पुकार सुनकर स्वयं पंढरीनाथ प्रकट हो गए।चित्र में यही अलौकिक क्षण दिखाया गया है, जहाँ भगवान विठ्ठल स्वयं अपने हाथों से सखूबाई के बंधनों (रस्सियों) को खोल रहे हैं।बंधन खोलने के बाद भगवान ने सखूबाई से कहा कि वे तुरंत पंढरपुर यात्रा पर निकल जाएं।सखूबाई के पीछे उनके घर में किसी को उनके जाने का पता न चले, इसलिए स्वयं भगवान विठ्ठल ने सखूबाई का रूप धारण कर लिया और उनकी जगह खंभे से बंध गए।भगवान का सेवक बननाजब ससुराल वालों ने 'सखूबाई' (जो वास्तव में भगवान थे) को खंभे से खोला, तो भगवान ने चुपचाप सखूबाई के रूप में घर के सारे कठिन काम—जैसे पानी भरना, झाड़ू-पोछा करना और अनाज पीसना—शुरू कर दिए। भगवान की इस दिव्य उपस्थिति के कारण घर के लोगों का हृदय भी बदलने लगा और उनका व्यवहार सात्विक हो गया।उधर असली सखूबाई ने पंढरपुर जाकर भगवान के साक्षात दर्शन किए। जब वे यात्रा से वापस लौटीं, तो उन्होंने देखा कि स्वयं भगवान उनके रूप में पानी भर रहे थे। सखूबाई भगवान के चरणों में गिर पड़ीं और भगवान अपनी लीला पूरी कर अंतर्ध्यान हो गए।
यह कथा सिखाती है कि जब कोई भक्त पूरी निष्ठा और सच्चे दिल से भगवान को पुकारता है, तो भगवान उसके कष्टों को दूर करने के लिए स्वयं उसके सेवक तक बन जाते हैं।
जय श्रीकृष्ण.
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