sn vyas
#शुभ सोमवार
राम ! राम !! राम !!! राम !!!!
*विशेष बात*
अहंकार रहित होकर नि:स्वार्थ भाव से कहीं भी प्रेम किया जाए, तो वह प्रेम स्वत: प्रेममय भगवान् की तरफ चला जाता है । कारण कि अपना अहंकार और स्वार्थ ही भगवत्प्रेम में बाधा लगाता है । इन दोनों के कारण मनुष्य का प्रेम भाव सीमित हो जाता है और इनका त्याग करने पर उसका प्रेम भाव व्यापक हो जाता है । प्रेम भाव व्यापक होने पर उसके माने हुए सभी बनावटी संबंध मिट जाते हैं और भगवान् का स्वाभाविक नित्य संबंध जाग्रत् हो जाता है ।
राम ! राम !! राम !!! राम !!!!