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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - दर्द कागज़ पर मेरा बिकता रहा मैं बेचैन था, रातभर लिखता रहा.. @ छू रहे थे सब बुलंदियाँ आसमान मैं सितारों के बीच, चाँद की तरह छिपता < अगर होती तो, कभी का टूट गया होता , मैं था नाजुक डाली, जो सबके आगे झुकता रहा.. बदलते यहाँ लोग, रंग अपने अपने ढंग से, रंग मेरा भी निखर पर, मैं महेंदी की तरह पीसता रहा.. जिन्हें जल्दी थी, वो बढ चले मंज़िल की ओर मैं समंदर से राज, गहराई में डूबता रहा. दर्द कागज़ पर मेरा बिकता रहा मैं बेचैन था, रातभर लिखता रहा.. @ छू रहे थे सब बुलंदियाँ आसमान मैं सितारों के बीच, चाँद की तरह छिपता < अगर होती तो, कभी का टूट गया होता , मैं था नाजुक डाली, जो सबके आगे झुकता रहा.. बदलते यहाँ लोग, रंग अपने अपने ढंग से, रंग मेरा भी निखर पर, मैं महेंदी की तरह पीसता रहा.. जिन्हें जल्दी थी, वो बढ चले मंज़िल की ओर मैं समंदर से राज, गहराई में डूबता रहा. - ShareChat