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#reality #life #Reality Of Life ##life
reality - गहरी है! बात तजुर्बा कहता है खामोशियां ही बेहतर है अल्फाज़ो से लोग रूठते बहुत हैं ज़िंदगी गुजर गई सबको खुश करने में जो खुश हुए वो अपने नहीं थे जो अपने थे वो कभी खुश नहीं हुए कितना भी समेट लो हाथों को फिसलता ज़रूर हैं ये वक्त है साहब बदलता ज़रूर है.. गहरी है! बात तजुर्बा कहता है खामोशियां ही बेहतर है अल्फाज़ो से लोग रूठते बहुत हैं ज़िंदगी गुजर गई सबको खुश करने में जो खुश हुए वो अपने नहीं थे जो अपने थे वो कभी खुश नहीं हुए कितना भी समेट लो हाथों को फिसलता ज़रूर हैं ये वक्त है साहब बदलता ज़रूर है.. - ShareChat