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Rohan singh - Author on ShareChat
Rohan singh
740 views • 3 months ago
#🎤📢श्रीमद्भागवत गीता श्लोक #🙏🏵️ गीता श्लोक 🌼🙏 #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #भगवत गीता श्लोक
दशन युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्ठस्य chy ।युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा || १७१ भावः जो आहार और आमोद- प्रमोद को संयमित रखते हैं॰ कर्म को संतुलित रखते हैं ओर निद्रा पर नियंत्रण रखते ह॰चे योग का अपने दुःखों को कम कर सकते हें॰ अभ्यास कर >6 श्लोक -१७ अध्याय श्रीमदभगवद्गीता  दशन युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्ठस्य chy ।युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा || १७१ भावः जो आहार और आमोद- प्रमोद को संयमित रखते हैं॰ कर्म को संतुलित रखते हैं ओर निद्रा पर नियंत्रण रखते ह॰चे योग का अपने दुःखों को कम कर सकते हें॰ अभ्यास कर >6 श्लोक -१७ अध्याय श्रीमदभगवद्गीता
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  • लक्ष्मीनारायण नागला - Author on ShareChat
    लक्ष्मीनारायण नागला
    #भगवद गीता के सभी श्लोक #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #भगवत गीता श्लोक #🎤📢श्रीमद्भागवत गीता श्लोक #🙏🏵️ गीता श्लोक 🌼🙏
    कर्मण्येवधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। कर्मफलहेतुर्भूम [ मा ते राङ्ोडस्त्वकर्मणि , लक्ष्मीनारायण नागला कर्मण्येवधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। कर्मफलहेतुर्भूम [ मा ते राङ्ोडस्त्वकर्मणि , लक्ष्मीनारायण नागला
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  • MUKESH Nagar - Author on ShareChat
    MUKESH Nagar
    #श्रीमद् भागवत गीता #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #श्रीमद्भागवत गीता #🎤📢श्रीमद्भागवत गीता श्लोक #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta
    त्वमादिदेवः पुराण- पुरुषः स्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम्। am ೩ೆ೯೯೩ 8ಗ विश्वमनन्तरूप I।  7 aI आप आदिदेव और सनातन पुरुप हैं आप इस जगतके परम आश्रय और जाननेवाले तथा जाननेयोग्य और परम धाम हैं। हे अनन्तरूप ! आपसे यह सव जगत् व्याप्त अर्थात् परिपूर्णं है Il ३८ II वायुर्यमोउग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च | नमो   नमस्तेषस्तु   सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोषपि नमो   नमस्ते ।I आप वायु यमराज, अग्नि, वरुण, चन्द्रमा, प्रजाके स्वामौ त्रह्या और ब्रह्माके भौ पिता हॅं। आपके लियै हजारों वार नमस्कार ! नमस्कार हो!! आपके लिये फिर भी वार-्चार नमस्कार ! नमस्कार ! ! I१ ३९ I। पृष्ठतस्ते नमः पुरस्तादथ नमोउस्तु ते सर्वंत एव सर्वं अनन्तवीर्यमितविक्रमस्त्वं- सर्वं समाजोषि ततोउसि सर्वः Il हे अनन्त सामर्थ्यवाले ! आपके लिये आगेसे और पीछेसै भी नमस्कार! है सर्वांत्मन् ! आपके लिये सव औरसे हीो नमस्कार हा। क्योंकि अनन्त पराक्रमशालो आप समस्त संसारको व्याप्त कियै हुए हैॅ॰ इससे आप ही सर्वरूप हैं Il ४० Il श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार त्वमादिदेवः पुराण- पुरुषः स्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम्। am ೩ೆ೯೯೩ 8ಗ विश्वमनन्तरूप I।  7 aI आप आदिदेव और सनातन पुरुप हैं आप इस जगतके परम आश्रय और जाननेवाले तथा जाननेयोग्य और परम धाम हैं। हे अनन्तरूप ! आपसे यह सव जगत् व्याप्त अर्थात् परिपूर्णं है Il ३८ II वायुर्यमोउग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च | नमो   नमस्तेषस्तु   सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोषपि नमो   नमस्ते ।I आप वायु यमराज, अग्नि, वरुण, चन्द्रमा, प्रजाके स्वामौ त्रह्या और ब्रह्माके भौ पिता हॅं। आपके लियै हजारों वार नमस्कार ! नमस्कार हो!! आपके लिये फिर भी वार-्चार नमस्कार ! नमस्कार ! ! I१ ३९ I। पृष्ठतस्ते नमः पुरस्तादथ नमोउस्तु ते सर्वंत एव सर्वं अनन्तवीर्यमितविक्रमस्त्वं- सर्वं समाजोषि ततोउसि सर्वः Il हे अनन्त सामर्थ्यवाले ! आपके लिये आगेसे और पीछेसै भी नमस्कार! है सर्वांत्मन् ! आपके लिये सव औरसे हीो नमस्कार हा। क्योंकि अनन्त पराक्रमशालो आप समस्त संसारको व्याप्त कियै हुए हैॅ॰ इससे आप ही सर्वरूप हैं Il ४० Il श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार
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