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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - लिए आम सूचना या भता नाटस जRा नहा।कया रूकूटी ओर साइकिल जलकर राखहो ETTI 131 !4দ)( हम राजस्थानी - प्रकृति बचेगी तो विकास बचेगा পরানী, সাঁসল 3াং সমীন ক্রী खर्च नहीं, पूंजी माना जाए "னத்ி एटलस के अनुसार राजस्थान देश में मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में है। राज्य सिंह मैवाड़ का बड़ा हिस्सा विंड एरोजन , पानी की कमी और वनस्पति लक्ष्यराज क्षरण से प्रभावित है। इन सबके बीच अरावली राजस्थान पूर्व राजपरिवार के सदंस्य उदयपुर lakshyarajsingh mewar@ की सबसे बड़ी प्राकृतिक ढाल हे। यह पर्वतमाला थार के eternalmewarin आंधियों को तीव्रता कम विस्तार को रोकती है धूलभरी  विश्व पर्यावरण दिवस करती है और भूजल रीचार्ज में मदद करती है। लेकिन हर साल आता है॰ लेकिन अवैध खननः अतिक्रमण और अनियोजित निर्माण ने राजस्थान के लिए यह केवल कैलेंडर की तारीख नहीं, अरावली को कमजोर किया है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया चेतावनी की घंटी है। यह प्रदेश सदियों से कम पानी, तेज की २०२३ रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान का वन आच्छादन  गर्मी और कठिन भूगोल के बींच जीवन की कला सिखाता केवल करीब ४ ८४% है। राष्ट्रीय वन नीति के ३३% लक्ष्य  आया है। यहां तालाब, बावड़ी , जोहड़ और खड़ीन केवल की तुलना में यह बहुत कम है। जल संरचनाएं नहीं थे, बल्कि समाज की सामूहिक समझ राजस्थान के सामने चुनौती बड़ी है॰ लेकिन अवसर  के प्रतीक थे। लेकिन आज वही राजस्थान जल संकट गर्मी, मरुस्थलीकरण , घटते वन क्षेत्र और अरावली নরলী से जूझ रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड पर बढते दबाव राजस्थानं का इतिहास बताता है कि एन्चायर्नमेंट की स्टेट ऑफ एन्वायर्नमेंट २०२६ रिपोर्ट यहां प्रकृति से संघर्ष नहीं सह ्अस्तित्व  ने स्पष्ट किया है कि राजस्थान देश के सबसे अधिक की परंपरा रही है। बिश्नोई समाज का पर्यावरणीय दबाव झेलने वाले राज्यों में शामिल है। रिपोर्ट बलिदान, मेवाड़ की जल परंपरा और बताती है कि राज्य के ६०% से अधिक हिस्से में भूजल स्तर खतरनाक रूप से गिर चुका है। औसतन हर साल १५ मरुस्थल के र्गांवों की समझ आज भी मीटर की गिरावट दर्ज की जा रही है। कई जिलों में पानी रास्ता दिखाती है। जरूरत fama इस  को उपलब्धता प्रति व्यक्ति ५०० घन मीटर से भी कम है। को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की है। यह स्थिति केवल जल संकट नहीं , बल्कि जीवन संकट है। सबसे गंभीर संकट पानी का है। केंद्रीय भूजल बोर्ड  की २०२३ की रिपोर्ट बताती है कि राजस्थान के बड़े भी उतना ही बड़ा है। राज्य सौर ऊर्जा में देश को अग्रणी हिस्से में भूजल दोहन सुरक्षित सीमा से ऊपर जा चुका शक्त बन सकता है। MNRE के अनुसार अप्रैल २०२e  है। कई ब्लॉक अतिदोहित श्रेणी में हैं। इसका सीधा अर्थ तक भारत की कुल सौर क्षमता १५४ गोगावॉट से अधिक है कि जितना पानी जमीन में रीचार्ज हो रहा है॰ उससे है और राजस्थान इस यात्रा का प्रमुख केंद्र चुकी पहुच अधिक निकाला जा रहा है। है। लेकिन हरित ऊर्जा तभी सार्थक होगी जब इसके साथ दूसरा बड़ा खतरा बढ़ती गर्मी है। हाल के वर्षों में जल संरक्षण स्थानीय रोजगार, जैव विविधता और राजस्थान में हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढी हैं। जमीन के विवेकपूर्ण उपयोग को भी जोड़ा जाए। समाधान केवल सरकारों से नहों आएगा। गांबों में पारंपरिक जल पिछले तीन वर्षों में औसत ताप्मान वृद्धि १ ५C से अधिक  शहरों में बारिश के पानी की रही है। २०२५ में राज्य में २२ दिनों तक तापमान ४SC से संरचनाओं का पुनजींवन  ऊपर रहा। इस साल भी श्रीगंगानगर जैसे शहरों में तापमान हार्वेस्टिंग की सखती॰ अराबली क्षेत्र में जीरो टॉलरेंस  नीति खनन पर कठोर निगरानी और स्शानीय प्रजातियों  ४७ डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज हुआ। गर्मी अब केवल वृक्षारोपणन्ये च सब साथ साथ चलने होंगे। विकास का मौसम की असुविधा नहीं रही। यह मजदूर को रोजी  কষা अर्थ केवल सडक एमारत ओर उदयोग नहीं हो सकता। किसान बुजुर्गों के स्वास्थ्य ओर बच्चों की फसल विकास बह {जो आने बाली पीढ़ी के हिस्से का पानी  पढ़़ाई तक को प्रभावित कर रही है। तीसरा संकट जमीन का हे। इसरो की डेजर्टिफिकेशन एंड लेंड डीग्रेडेशन  और हवा न छीने।  लिए आम सूचना या भता नाटस जRा नहा।कया रूकूटी ओर साइकिल जलकर राखहो ETTI 131 !4দ)( हम राजस्थानी - प्रकृति बचेगी तो विकास बचेगा পরানী, সাঁসল 3াং সমীন ক্রী खर्च नहीं, पूंजी माना जाए "னத்ி एटलस के अनुसार राजस्थान देश में मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में है। राज्य सिंह मैवाड़ का बड़ा हिस्सा विंड एरोजन , पानी की कमी और वनस्पति लक्ष्यराज क्षरण से प्रभावित है। इन सबके बीच अरावली राजस्थान पूर्व राजपरिवार के सदंस्य उदयपुर lakshyarajsingh mewar@ की सबसे बड़ी प्राकृतिक ढाल हे। यह पर्वतमाला थार के eternalmewarin आंधियों को तीव्रता कम विस्तार को रोकती है धूलभरी  विश्व पर्यावरण दिवस करती है और भूजल रीचार्ज में मदद करती है। लेकिन हर साल आता है॰ लेकिन अवैध खननः अतिक्रमण और अनियोजित निर्माण ने राजस्थान के लिए यह केवल कैलेंडर की तारीख नहीं, अरावली को कमजोर किया है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया चेतावनी की घंटी है। यह प्रदेश सदियों से कम पानी, तेज की २०२३ रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान का वन आच्छादन  गर्मी और कठिन भूगोल के बींच जीवन की कला सिखाता केवल करीब ४ ८४% है। राष्ट्रीय वन नीति के ३३% लक्ष्य  आया है। यहां तालाब, बावड़ी , जोहड़ और खड़ीन केवल की तुलना में यह बहुत कम है। जल संरचनाएं नहीं थे, बल्कि समाज की सामूहिक समझ राजस्थान के सामने चुनौती बड़ी है॰ लेकिन अवसर  के प्रतीक थे। लेकिन आज वही राजस्थान जल संकट गर्मी, मरुस्थलीकरण , घटते वन क्षेत्र और अरावली নরলী से जूझ रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड पर बढते दबाव राजस्थानं का इतिहास बताता है कि एन्चायर्नमेंट की स्टेट ऑफ एन्वायर्नमेंट २०२६ रिपोर्ट यहां प्रकृति से संघर्ष नहीं सह ्अस्तित्व  ने स्पष्ट किया है कि राजस्थान देश के सबसे अधिक की परंपरा रही है। बिश्नोई समाज का पर्यावरणीय दबाव झेलने वाले राज्यों में शामिल है। रिपोर्ट बलिदान, मेवाड़ की जल परंपरा और बताती है कि राज्य के ६०% से अधिक हिस्से में भूजल स्तर खतरनाक रूप से गिर चुका है। औसतन हर साल १५ मरुस्थल के र्गांवों की समझ आज भी मीटर की गिरावट दर्ज की जा रही है। कई जिलों में पानी रास्ता दिखाती है। जरूरत fama इस  को उपलब्धता प्रति व्यक्ति ५०० घन मीटर से भी कम है। को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की है। यह स्थिति केवल जल संकट नहीं , बल्कि जीवन संकट है। सबसे गंभीर संकट पानी का है। केंद्रीय भूजल बोर्ड  की २०२३ की रिपोर्ट बताती है कि राजस्थान के बड़े भी उतना ही बड़ा है। राज्य सौर ऊर्जा में देश को अग्रणी हिस्से में भूजल दोहन सुरक्षित सीमा से ऊपर जा चुका शक्त बन सकता है। MNRE के अनुसार अप्रैल २०२e  है। कई ब्लॉक अतिदोहित श्रेणी में हैं। इसका सीधा अर्थ तक भारत की कुल सौर क्षमता १५४ गोगावॉट से अधिक है कि जितना पानी जमीन में रीचार्ज हो रहा है॰ उससे है और राजस्थान इस यात्रा का प्रमुख केंद्र चुकी पहुच अधिक निकाला जा रहा है। है। लेकिन हरित ऊर्जा तभी सार्थक होगी जब इसके साथ दूसरा बड़ा खतरा बढ़ती गर्मी है। हाल के वर्षों में जल संरक्षण स्थानीय रोजगार, जैव विविधता और राजस्थान में हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढी हैं। जमीन के विवेकपूर्ण उपयोग को भी जोड़ा जाए। समाधान केवल सरकारों से नहों आएगा। गांबों में पारंपरिक जल पिछले तीन वर्षों में औसत ताप्मान वृद्धि १ ५C से अधिक  शहरों में बारिश के पानी की रही है। २०२५ में राज्य में २२ दिनों तक तापमान ४SC से संरचनाओं का पुनजींवन  ऊपर रहा। इस साल भी श्रीगंगानगर जैसे शहरों में तापमान हार्वेस्टिंग की सखती॰ अराबली क्षेत्र में जीरो टॉलरेंस  नीति खनन पर कठोर निगरानी और स्शानीय प्रजातियों  ४७ डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज हुआ। गर्मी अब केवल वृक्षारोपणन्ये च सब साथ साथ चलने होंगे। विकास का मौसम की असुविधा नहीं रही। यह मजदूर को रोजी  কষা अर्थ केवल सडक एमारत ओर उदयोग नहीं हो सकता। किसान बुजुर्गों के स्वास्थ्य ओर बच्चों की फसल विकास बह {जो आने बाली पीढ़ी के हिस्से का पानी  पढ़़ाई तक को प्रभावित कर रही है। तीसरा संकट जमीन का हे। इसरो की डेजर्टिफिकेशन एंड लेंड डीग्रेडेशन  और हवा न छीने। - 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