राजनीति में विषम मोड़ भृंग मरीचिका प्यास बुझे की अलग कथा
राजा भोज मिला करते है कभी लेकर गये प्रार्थना पत्र व्यर्थ प्रथा
जनता जनार्दन वश एक दिवस गंगू तेली सी खड़ी लगाकर कतार
है व्यस्त या अस्त व्यस्त भोज बहुत जैसे म्यान फांसे हो कटार
उमंग सुल्लेरे लेखक ✍️
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