"जो जग को हंसना सिखलाते, उनको ये जग छलता है
जो अपने आँशु की गंगा नहलाते, उनको ये जग ज़हर उगलता है"
- उमंग सुल्लेरे ✍️
जनपद महोबा, उत्तर प्रदेश
#उमंगसुल्लेरे #लेखक #कविता #महोबा #उत्तरप्रदेश
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #🆕 ताजा अपडेट ये सच्चाई है उन सारे संवेदनशील रचनाकारों, शिक्षकों, कलाकारों और अच्छे इंसानों की, जो दूसरों को रोशनी देते हैं लेकिन खुद अंधेरे में रह जाते हैं। #🎙सामाजिक समस्या