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कवि सुमित मानधना 'गौरव' ( "कुछ मेरी कलम से ")
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2 दिन पहले
महज कागज का टुकड़ा नहीं दिल की पूरी किताब है। सजाए थे आँखों में तुम्हारे लिए इनमें वो सारे ख़्वाब है। जब मुकम्मल नहीं हुए सपने बिखर गए हम टूट टूट कर, तभी से मिला हुआ हमें 'घायल शायर' का ये खिताब है! ✍🏻सुमित मानधना 'गौरव' दी घायल शायर 💔
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